CJP: गुवाहाटी में CJP टीम पर पुलिस कार्रवाई, आशुतोष रांका ने उठाए बड़े सवाल
CJP: असम में चल रहे जनसंपर्क अभियान के दौरान CJP के को-फाउंडर आशुतोष रांका और उनकी टीम को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल खड़े किए।
CJP: असम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभियान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गुवाहाटी में संगठन के को-फाउंडर आशुतोष रांका और उनकी टीम को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। घटना के बाद रांका ने असम सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनकी टीम जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करने और जमीनी हालात समझने के लिए राज्य का दौरा कर रही थी।
अभियान के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, CJP की टीम असम के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से संवाद कर रही थी। इसी क्रम में गुवाहाटी में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद संगठन की ओर से सवाल उठाए गए और इसे लोकतांत्रिक गतिविधियों में बाधा बताया गया। वहीं, प्रशासनिक पक्ष से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिए जाने की चर्चा है।
रांका का कहना है कि उनकी टीम किसी राजनीतिक रैली या प्रदर्शन में शामिल नहीं थी, बल्कि विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर लोगों की राय जानने का काम कर रही थी। ऐसे में हिरासत की कार्रवाई को लेकर उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर उठाए सवाल
आशुतोष रांका ने दावा किया कि उनकी टीम असम के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रही थी। उनका कहना है कि कई इलाकों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें सामने लाने की आवश्यकता है। रांका के अनुसार, यदि स्कूलों की जमीनी तस्वीर देश के सामने आएगी तो शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी टीम द्वारा जुटाई जा रही जानकारी और जनसंपर्क अभियान से सरकार असहज महसूस कर रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
काजीरंगा और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा भी उठाया
रांका ने अपने बयान में काजीरंगा क्षेत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के अधिकार, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की जरूरत है। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास और संरक्षण के नाम पर स्थानीय आबादी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हालांकि सरकार या संबंधित विभागों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
SIR और अन्य मुद्दों पर चला रही थी अभियान
CJP की टीम हाल के दिनों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत कई प्रशासनिक और सामाजिक विषयों को लेकर अभियान चला रही है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में जाकर जनता से सीधे संवाद करना और उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।
इसी कड़ी में असम दौरे को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन हिरासत की घटना के बाद यह अभियान राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
घटना के बाद असम की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और स्थानीय समूह इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासनिक पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। CJP ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी। वहीं, राज्य प्रशासन और सरकार की ओर से आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर और स्पष्टीकरण सामने आ सकता है।



