Maha Saptami 2026: महासप्तमी की पूजा 17 या 18 अक्टूबर को? जानें शहर के हिसाब से सही तारीख
Maha Saptami 2026: सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह 5:54 बजे से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 8:27 बजे तक रहेगी। कोलकाता और दिल्ली-NCR में पूजा की तारीख अलग होने की वजह भी जानें।
Maha Saptami 2026: दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच महासप्तमी 2026 की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि पूजा 17 अक्टूबर को की जाएगी या 18 अक्टूबर को। इसकी वजह सप्तमी तिथि का दो कैलेंडर दिनों में पड़ना और अलग-अलग शहरों में सूर्योदय का समय अलग होना है।
उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, सप्तमी तिथि शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन रविवार, 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर होगा। इस तरह तिथि की अवधि लगभग 26 घंटे 33 मिनट रहेगी।
हालांकि, तिथि शुरू होने की तारीख और किसी विशेष परंपरा में मुख्य पूजा का दिन हमेशा एक ही नहीं होता। इसी कारण कोलकाता के दुर्गा पूजा कैलेंडर में महासप्तमी और कोलाबौ पूजा 18 अक्टूबर को दर्ज हैं, जबकि दिल्ली-NCR के कैलेंडर में नवपत्रिका पूजा के लिए 17 अक्टूबर की तारीख बताई गई है।
सप्तमी तिथि का पूरा समय और पूजा की तारीख
महासप्तमी से संबंधित प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं:
- सप्तमी तिथि शुरू: 17 अक्टूबर 2026, सुबह 5:54 बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त: 18 अक्टूबर 2026, सुबह 8:27 बजे
- तिथि की कुल अवधि: करीब 26 घंटे 33 मिनट
- कोलकाता में महासप्तमी और कोलाबौ पूजा: 18 अक्टूबर 2026
- दिल्ली-NCR में नवपत्रिका पूजा: उपलब्ध कैलेंडर के अनुसार 17 अक्टूबर 2026
यहां दिए गए समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं। पूजा के मुहूर्त और अनुष्ठान की तारीख की अंतिम पुष्टि स्थानीय पंचांग या संबंधित पूजा समिति से करना उचित होगा।
कोलकाता में 18 अक्टूबर को ही क्यों मनाई जाएगी महासप्तमी?
कोलकाता में महासप्तमी की तारीख समझने के लिए सूर्योदय के समय को देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को कोलकाता में सूर्योदय सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। उस समय सप्तमी तिथि शुरू नहीं हुई होगी, क्योंकि इसका आरंभ सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर निर्धारित है। यानी सूर्योदय के समय षष्ठी तिथि रहेगी।
इसके अगले दिन, 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि मौजूद होगी। इसी आधार पर कोलकाता के दुर्गा पूजा कैलेंडर में महासप्तमी और कोलाबौ पूजा रविवार को रखी गई है।
इसलिए बंगाल में दुर्गा पूजा के अनुष्ठानों में शामिल होने वाले लोगों के लिए स्थानीय पूजा कैलेंडर देखना महत्वपूर्ण है। केवल तिथि के आरंभ होने की तारीख के आधार पर पूजा का दिन तय करने से गलतफहमी हो सकती है।
दिल्ली-NCR में 17 अक्टूबर की तारीख क्यों दी गई है?
दिल्ली और कोलकाता में सूर्योदय का समय अलग-अलग होता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, दिल्ली में 17 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। तब तक सप्तमी तिथि शुरू हो चुकी होगी।
इसी वजह से दिल्ली-NCR के कैलेंडर में 17 अक्टूबर को नवपत्रिका पूजा की तारीख बताई गई है। दूसरी ओर, कोलकाता के कैलेंडर में मुख्य महासप्तमी अनुष्ठान 18 अक्टूबर को दर्ज हैं।
हालांकि, अलग-अलग पंचांगों और पूजा परंपराओं में अनुष्ठान की तारीख या मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के अनुसार जारी जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
क्या सप्तमी तिथि लगातार दो दिन रहेगी?
सप्तमी तिथि 17 और 18 अक्टूबर, दोनों तारीखों में पड़ रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि तिथि पूरे 48 घंटे तक चलेगी। उपलब्ध समय के अनुसार इसकी अवधि लगभग 26 घंटे 33 मिनट है।
हिंदू पंचांग में तिथि सूर्य और चंद्रमा की आपसी कोणीय दूरी से निर्धारित होती है। दोनों की सापेक्ष गति के कारण तिथि की अवधि हर बार ठीक 24 घंटे नहीं होती। इसी वजह से कोई तिथि एक दिन सुबह शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रह सकती है।
इस प्रकार 17 और 18 अक्टूबर, दोनों तारीखों का उल्लेख होना तिथि की अवधि और स्थानीय पूजा परंपरा से जुड़ा है।
महासप्तमी पर क्या है नवपत्रिका पूजा का महत्व?
बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में महासप्तमी के दिन नवपत्रिका पूजा का विशेष महत्व है। इस अनुष्ठान में नौ प्रकार के पौधों या पत्तियों के समूह को धार्मिक विधि से स्नान कराकर देवी की पूजा में स्थापित किया जाता है। बंगाल में इसे कोलाबौ पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
महासप्तमी के अवसर पर नवपत्रिका पूजा के साथ देवी के अन्य अनुष्ठान भी किए जाते हैं। इनमें महास्नान और देवी की विशेष पूजा शामिल हो सकती है। पूजा पद्धति और अनुष्ठानों का क्रम स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
पूजा से पहले स्थानीय पंचांग जरूर देखें
महासप्तमी पर पूजा करने या दुर्गा पूजा पंडालों में जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को अपने शहर की तारीख और मुहूर्त की पुष्टि कर लेनी चाहिए। कोलकाता में उपलब्ध पूजा कैलेंडर 18 अक्टूबर को महासप्तमी और कोलाबौ पूजा की तारीख बताता है, जबकि दिल्ली-NCR में नवपत्रिका पूजा के लिए 17 अक्टूबर का उल्लेख है।
तिथि, सूर्योदय और स्थानीय धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखकर ही पूजा की योजना बनाना बेहतर होगा। अंतिम जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग, मंदिर या पूजा समिति की सूचना देखें।



