Yuvraj Manchanda Case: युवराज मौत मामले में पुलिस की कार्यशैली पर कोर्ट के तीखे सवाल, जांच प्रक्रिया पर उठे कई प्रश्न
Yuvraj Manchanda Case: साकेत कोर्ट ने पूछा- अज्ञात शव की पहचान से पहले अंतिम संस्कार क्यों किया गया, रिकॉर्ड और सबूतों के संरक्षण पर भी मांगा जवाब
Yuvraj Manchanda Case: रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े युवराज सिंह मंचंदा की मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कई ऐसे सवाल उठाए, जो जांच प्रक्रिया और शव की पहचान से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि अज्ञात शव मिलने के कुछ ही दिनों बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अदालत ने मांगा पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि शव की पहचान सुनिश्चित किए बिना अंतिम संस्कार की अनुमति कैसे दी गई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी होता है, ताकि बाद में किसी तरह की जांच प्रभावित न हो।
अदालत ने यह भी जानना चाहा कि शव मिलने के बाद उससे जुड़ी जानकारी को संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों तक पहुंचाने में देरी क्यों हुई।
पहचान और सूचना प्रणाली पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान ZIPNET पोर्टल का मुद्दा भी सामने आया। यह पोर्टल गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात शवों की जानकारी साझा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोर्ट ने पूछा कि यदि अज्ञात शव मिला था, तो उसकी जानकारी समय पर सिस्टम में दर्ज क्यों नहीं की गई।
अदालत का मानना है कि ऐसी जानकारी समय पर साझा होने से पहचान की संभावना बढ़ जाती है और परिवारों को राहत मिल सकती है।
पोस्टमार्टम और सबूतों पर भी चर्चा
कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि जांच से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं में स्पष्टता की जरूरत है। अदालत ने पूछा कि फोरेंसिक और मेडिकल प्रक्रिया के दौरान सभी जरूरी मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
इसके अलावा, शव से जुड़े सामान और अन्य संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के संबंध में भी पुलिस से जवाब मांगा गया।
परिवार ने जताई नाराजगी
युवराज के परिजनों का कहना है कि यदि पहचान और जांच प्रक्रिया को अधिक सावधानी से पूरा किया जाता, तो कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब पहले ही मिल सकते थे। परिवार की ओर से अदालत में दायर याचिका में रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और जांच से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
हत्या के आरोप और जांच
पुलिस जांच के अनुसार, युवराज सिंह मंचंदा कुछ दिनों तक लापता रहे थे। बाद में हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों ने अपराध को छिपाने के लिए कई प्रयास किए थे। हालांकि मामले के कई पहलुओं की अभी भी जांच जारी है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल अदालत ने मामले में उठाए गए बिंदुओं पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है। कोर्ट का कहना है कि याचिका में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
इस बीच, युवराज मौत मामला अब केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं और जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।



