नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम में सभी संबंधित राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इससे वर्षों से लंबित इस परियोजना का रास्ता साफ हो जाएगा।
किन राज्यों को कितना पानी मिलेगा?
प्रस्तावित योजना के अनुसार हरियाणा को सबसे अधिक 836 क्यूसेक पानी मिलेगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी आवंटित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तर भारत के कई राज्यों में जल संकट कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बिजली उत्पादन में भी होगा बड़ा फायदा
किशाऊ बांध से 660 मेगावॉट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अनुमान है कि हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली तैयार होगी। इस बिजली का लाभ मुख्य रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को मिलेगा।
दिल्ली और राजस्थान हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी का उपयोग करेंगे। इसके बदले वे बिजली परियोजना की लागत में वित्तीय योगदान देंगे।
क्या है किशाऊ परियोजना?
किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर विकसित की जा रही है। टोंस, यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी मानी जाती है।
परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद यह टिहरी बांध के बाद एशिया के सबसे ऊंचे बांधों में शामिल होगा। इसकी जल भंडारण क्षमता 1561.91 मिलियन घन मीटर निर्धारित की गई है।
यमुना नदी को कैसे मिलेगा लाभ?
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना से यमुना नदी में सालभर बेहतर जल प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी। मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी का भंडारण किया जा सकेगा, जबकि गर्मी के मौसम में नियंत्रित जल छोड़कर नदी के प्रवाह को बनाए रखा जाएगा।
इसके अलावा बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण के क्षेत्र में भी यह परियोजना अहम साबित हो सकती है।
छह दशक बाद क्यों बनी सहमति?
किशाऊ परियोजना की अवधारणा लगभग 60 वर्ष पहले तैयार की गई थी। हालांकि लागत, जल बंटवारे, पर्यावरणीय पहलुओं और राज्यों की हिस्सेदारी जैसे मुद्दों के कारण यह योजना लंबे समय तक अटकी रही।
अब छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि यह समझौता जल प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।