Ganpati Visarjan Muhurat 2026: गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और पंडालों में विराजमान किए गए डेढ़ दिन के गणपति को आज, 15 सितंबर 2026 को विदाई दी जाएगी। भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की अंतिम पूजा कर उनका विसर्जन करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विसर्जन से पहले विधि-विधान से पूजा और आरती करने का विशेष महत्व होता है।
विसर्जन के लिए शुभ समय
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज गणपति विसर्जन के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं।
- दोपहर 12:16 बजे से 1:49 बजे तक
- दोपहर 3:21 बजे से शाम 4:54 बजे तक
- शाम 7:54 बजे से रात 9:21 बजे तक
- रात 10:49 बजे से 16 सितंबर तड़के 3:15 बजे तक
श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय परंपराओं के अनुसार इनमें से किसी भी समय बप्पा को विदाई दे सकते हैं।
डेढ़ दिन के गणपति की परंपरा
कई परिवारों में गणेश जी की स्थापना केवल डेढ़ दिन के लिए की जाती है। मान्यता है कि स्थापना के अगले दिन विशेष पूजा के बाद विसर्जन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है।
विदाई से पहले करें अंतिम पूजा
विसर्जन से पहले भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर और मोदक या अन्य प्रिय भोग अर्पित करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ आरती करें और बप्पा से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना भी करें।
पर्यावरण का रखें ध्यान
छोटी और मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए किसी साफ पात्र में प्रतिमा का विसर्जन करें और बाद में उस जल को पौधों में अर्पित कर दें। वहीं बड़ी प्रतिमाओं के लिए प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन स्थलों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
भक्तिमय माहौल में होगी बप्पा की विदाई
आज देशभर में “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष के बीच भक्त अपने प्रिय गणपति को विदाई देंगे। श्रद्धालु अगले वर्ष भगवान गणेश के पुनः आगमन की कामना करते हुए उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना करेंगे।