Uttar Pradesh: दिवाली से पहले CM योगी का किसानों को बड़ा तोहफा, फसल नुकसान पर राहत राशि में 25-30% की बढ़ोतरी, 10 लाख से ज्यादा किसानों को होगा फायदा

योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से फसल, जमीन और पशुधन को होने वाले नुकसान पर सहायता राशि बढ़ाई। आपदा में मौत पर अब 8 लाख रुपये मिलेंगे।

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिवाली से पहले प्रदेश के किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत दी है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों, जमीन, पशुधन और मकानों को होने वाले नुकसान पर दी जाने वाली सहायता राशि में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की रकम भी दोगुनी कर दी गई है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, बढ़ी हुई सहायता राशि का लाभ 1 अप्रैल से 4 नवंबर के बीच प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान के मामलों में भी मिलेगा। अब तक फसल और अन्य संपत्तियों के नुकसान पर निर्धारित पुराने मानकों के आधार पर सहायता दी जाती थी, लेकिन सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत राशि के नए मानक तय किए हैं। खास बात यह है कि इस फैसले में केवल फसलों को ही नहीं, बल्कि पशुपालन, रेशम उत्पादन और कृषि से जुड़े दूसरे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

प्राकृतिक आपदा में मौत पर अब मिलेंगे 8 लाख रुपये

योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में बड़ा बदलाव किया है। पहले मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर अब 8 लाख रुपये कर दिया गया है। यानी इस मद में मुआवजे की रकम दोगुनी हो गई है।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य आपदा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना है, ताकि किसी प्राकृतिक आपदा में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर परिजनों को तत्काल आर्थिक मदद मिल सके।

फसल और जमीन के नुकसान पर बढ़ी सहायता राशि

प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसल बर्बाद होने पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। नए मानकों के अनुसार सिंचित क्षेत्रों में फसल और जमीन के नुकसान पर मिलने वाला मुआवजा 17,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

वहीं, बारिश पर निर्भर यानी असिंचित क्षेत्रों में सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इसके अलावा बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी के लिए मिलने वाली सहायता 22,500 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

खेतों में जमा गाद और मिट्टी हटाने के लिए भी सरकार ने राहत बढ़ाई है। पहले इसके लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 23,000 रुपये कर दिया गया है। भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण जमीन को हुए नुकसान पर सहायता राशि 47,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है।

रेशम उत्पादन करने वाले किसानों को भी राहत

योगी सरकार ने रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को भी राहत देने का फैसला किया है। अब एरी, शहतूत और टसर रेशम उत्पादन के लिए सहायता राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

इसी तरह मूंगा रेशम उत्पादन के लिए मिलने वाली सहायता 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इस फैसले से रेशम उत्पादन के जरिए अपनी आजीविका चलाने वाले किसानों और उत्पादकों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी।

पशुपालकों और मुर्गी पालन करने वालों को भी फायदा

सरकार ने किसानों के साथ-साथ पशुपालन और पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए भी सहायता राशि बढ़ाई है। प्राकृतिक आपदा में पशुओं की मौत होने पर अब पहले के मुकाबले अधिक मुआवजा मिलेगा।

नए प्रावधानों के तहत बड़े पशुओं की मौत पर सहायता राशि 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। वहीं, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मौत पर मिलने वाली राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है।

घोड़े और खच्चर जैसे बोझा ढोने वाले जानवरों की मौत पर अब 20,000 रुपये के बजाय 25,400 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा मुर्गी पालन करने वाले किसानों को प्रति पक्षी मिलने वाली सहायता राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 130 रुपये कर दी गई है।

Delhi Pollution: दिवाली से पहले दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, कई इलाकों में AQI 450 के पार, सांस लेना मुश्किल

मकान और सरकारी बुनियादी ढांचे के नुकसान पर भी बढ़ी मदद

प्राकृतिक आपदाओं के कारण मकानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार ने नए मानक निर्धारित किए हैं। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए मैदानी इलाकों में 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93,000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी।

इसके अलावा सरकारी शैक्षणिक संस्थानों और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी सहायता राशि निर्धारित की गई है। प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए अधिकतम 15.50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। वहीं, माध्यमिक विद्यालयों, इंटरमीडिएट कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 26 लाख रुपये की सहायता तय की गई है।

सड़कों और अस्पतालों की मरम्मत के लिए भी नए मानक लागू किए गए हैं। सरकार का यह फैसला प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों, पशुपालकों और आम परिवारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Related Articles