Donald Trump: चुनावी हार के बाद भी ईरान पर हमले के फैसले से पीछे नहीं हटे ट्रंप, बोले- दोबारा मौका मिला तो फिर करूंगा कार्रवाई

Donald Trump: ट्रंप ने माना कि ईरान संघर्ष और पेट्रोल की महंगाई ने मतदाताओं को प्रभावित किया, तेहरान ने इसे अमेरिका की हार बताया।

Donald Trump: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली शिकस्त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति चर्चा के केंद्र में आ गई है। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ सैन्य संघर्ष और पेट्रोल की कीमतों में आई तेजी ने मतदाताओं की सोच पर असर डाला। हालांकि, उन्होंने इस कार्रवाई को गलत मानने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर उन्हें फिर से ऐसा निर्णय लेने का अवसर मिला तो वह ईरान पर हमला करने का फैसला दोहराएंगे।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका के लिए जरूरी था। वहीं, ईरान ने अमेरिकी चुनाव परिणामों को ट्रंप की राजनीतिक और रणनीतिक नाकामी करार दिया है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका में सत्ता के समीकरण बदलने से तेहरान के प्रति उसकी नीति में कोई खास बदलाव नहीं आने वाला।

चुनावी हार पर ट्रंप ने माना युद्ध का असर

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति से सवाल किया गया कि क्या फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई उनकी पार्टी की चुनावी हार की वजह बनी? इस पर ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस आकलन में काफी हद तक सच्चाई है।

दरअसल, वेंस ने एक्स पर अपनी पोस्ट में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए युद्ध को भी जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के साथ खड़े रहे कई मतदाता मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से नाराज थे। इस वजह से उन्होंने मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन नहीं किया।

ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं। इसका असर आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ा और चुनाव में यह मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने कहा कि यदि उन्हें फिर से वही परिस्थिति मिले तो वह ईरान पर कार्रवाई करने का निर्णय दोबारा लेंगे।

परमाणु हथियारों को रोकने के लिए जरूरी बताया हमला

ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उनकी प्राथमिकता थी। उनके अनुसार, यदि तेहरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में ईरान के भीतर कई चीजों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। ट्रंप ने एक अन्य सवाल के जवाब में भी दोहराया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वह अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं करते।

ईरान ने कहा- ट्रंप को राजनीतिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर हार मिली

अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बाद ईरान ने ट्रंप पर निशाना साधा है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ संघर्ष में दो स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ा है।

रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ईरानी जनता ने युद्ध के मैदान और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका को रणनीतिक चुनौती दी, जबकि वाशिंगटन में ट्रंप को राजनीतिक झटका लगा है।

उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण हासिल करने को ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव बताया। रजाई ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष का आर्थिक बोझ अमेरिकी जनता को उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि ईरान से टकराने वाले किसी भी पक्ष को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके मुताबिक, इस टकराव के परिणाम केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका असर संबंधित देशों के घरेलू हालात पर भी पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान का दावा

मोहसिन रजाई ने अपने बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य का खास तौर पर जिक्र किया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान ने संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के एक अहम माध्यम के रूप में पेश किया है।

रजाई का दावा है कि इस क्षेत्र में ईरान की भूमिका ने अमेरिका पर दबाव बनाया। हालांकि, उनका यह बयान ईरान की ओर से पेश किया गया राजनीतिक और रणनीतिक आकलन है।

खामेनेई ने अमेरिका की नीति बदलने की संभावना खारिज की

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिकी चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप को मध्यावधि चुनाव में नुकसान होने के बावजूद अमेरिका की ईरान के प्रति नीति बदलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

खामेनेई के अनुसार, अमेरिकी राजनीतिक दलों या सत्ता में मौजूद समूहों के बदलने से देश की मूल विदेश नीति और दबदबे की व्यवस्था में बदलाव नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को रियायतें देने से ईरान के प्रति उसका विरोध समाप्त हो जाएगा, ऐसी उम्मीद करना गलत है।

उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के खिलाफ दोबारा आक्रामक कार्रवाई की गई तो अगला संघर्ष पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।

चुनावी नतीजों के बाद बढ़ी अमेरिका-ईरान के बीच बयानबाजी

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन ने ट्रंप की घरेलू और विदेश नीति पर बहस तेज कर दी है। महंगाई, टैरिफ और ईरान के साथ सैन्य संघर्ष जैसे मुद्दों को चुनावी नतीजों से जोड़कर देखा जा रहा है।

एक तरफ ट्रंप ईरान के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो दूसरी ओर तेहरान इसे अमेरिकी नेतृत्व की विफलता के तौर पर पेश कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में बदलाव से दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती।

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