UP MLC Election: यूपी MLC चुनाव में UGC विवाद की आहट, 53 हजार से ज्यादा अवैध वोटों पर सियासी घमासान

UP MLC Election: 11 सीटों के नतीजों के बाद UGC के विरोध में लिखे संदेशों की चर्चा ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल।

UP MLC Election: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत में UGC का मुद्दा चर्चा में आ गया है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में पांच सीटें आईं। हालांकि, नतीजों के साथ ही 53,615 मतों के अमान्य होने का आंकड़ा भी राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ मतपत्रों पर मतदान करने के बजाय ‘UGC Roll Back’ लिखा गया था। हालांकि, ऐसे मतपत्रों की वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस चर्चा के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या UGC के मुद्दे पर मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी है और क्या इसका प्रभाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है।

चुनाव में कुल 6,69,982 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 6,16,367 वोट वैध पाए गए, जबकि 53,615 मतपत्र निरस्त कर दिए गए। इस तरह कुल पड़े मतों में लगभग आठ प्रतिशत वोट अमान्य रहे।

लखनऊ स्नातक सीट पर सबसे ज्यादा मतपत्र हुए निरस्त

विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए मतदान के आंकड़ों में लखनऊ स्नातक सीट सबसे ऊपर रही। यहां 11,233 मत अवैध घोषित किए गए। वाराणसी स्नातक सीट पर 9,663 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 9,596 मत अमान्य पाए गए।

अन्य सीटों पर अवैध मतों की स्थिति इस प्रकार रही:

विधान परिषद सीट अमान्य मत
लखनऊ स्नातक 11,233
वाराणसी स्नातक 9,663
इलाहाबाद-झांसी स्नातक 9,596
मेरठ शिक्षक 2,809
मेरठ स्नातक 3,976
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक 2,800
आगरा शिक्षक 2,128
आगरा स्नातक 5,852
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक 3,183
लखनऊ शिक्षक 936
वाराणसी शिक्षक 1,439

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अमान्य मतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर उन मतपत्रों की चर्चा हो रही है, जिन पर कथित रूप से UGC के विरोध में संदेश लिखे गए थे।

गोरखपुर में जीत के अंतर से लगभग नौ गुना अधिक अवैध वोट

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम भी कई सवाल खड़े कर रहा है। इस सीट पर विजेता और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी के बीच महज 307 मतों का अंतर था, जबकि यहां 2,800 मतपत्र अमान्य घोषित हुए। इस प्रकार निरस्त मतों की संख्या जीत के अंतर से करीब नौ गुना अधिक रही।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन अमान्य मतों में कितने वोट UGC के विरोध में संदेश लिखे जाने के कारण निरस्त हुए। साथ ही यह भी तय नहीं है कि अमान्य मतों के जरिए किसी विशेष राजनीतिक दल के प्रति नाराजगी जताई गई थी। इसलिए इन मतों को किसी पार्टी के समर्थन या विरोध के रूप में सीधे देखना उचित नहीं होगा।

सपा ने गोरखपुर सीट पर भी जीत का किया दावा

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक वाजपेयी ने कहा कि विपक्ष पांच सीटों के अलावा गोरखपुर की सीट पर भी जीत हासिल कर सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन का इस्तेमाल कर यादव प्रत्याशी को करीब 300 मतों से हरवाने का काम किया।

वाजपेयी के मुताबिक भाजपा ने UGC के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस विषय पर साफ रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का सिद्धांत है कि दोषी व्यक्ति बचना नहीं चाहिए और किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2027 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा।

कांग्रेस ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा

कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने अमान्य मतों की संख्या को युवाओं की नाराजगी से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर रोजगार के वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान युवाओं को बड़ी संख्या में नौकरियां देने की बातें की गई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है।

अवस्थी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, जबकि प्रदेश सरकार ने 70 लाख रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े अभ्यर्थियों का संघर्ष जारी है और शिक्षामित्रों की समस्याओं का भी समाधान नहीं हुआ है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय UGC का ऐसा मुद्दा खड़ा किया, जिससे एक वर्ग में नाराजगी पैदा हुई। उन्होंने UGC कानून में बदलाव की जरूरत बताई और करीब 54 हजार अवैध मतों को सरकार के खिलाफ असंतोष का संकेत बताया।

अवस्थी ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और योगी आदित्यनाथ की सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा तथा कांग्रेस-इंडिया गठबंधन सरकार बनाएगा।

सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी को लेकर उठे सवाल

वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय ने 53 हजार से अधिक मतों के अमान्य होने को भाजपा के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत बताया। उनके मुताबिक कई मतपत्रों पर ‘UGC Roll Back’ लिखे होने की चर्चा से यह सवाल उठा है कि क्या इस मुद्दे पर समाज के किसी वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की चुनावी रणनीति में अति पिछड़े, अनुसूचित जाति और सवर्ण मतदाताओं का समर्थन अहम भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यदि UGC विवाद के कारण सवर्ण मतदाताओं का कोई हिस्सा नाराज होता है तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव के सामाजिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

उपाध्याय ने लोकसभा चुनाव के दौरान क्षत्रिय समाज की नाराजगी से जुड़ी चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि UGC के मुद्दे पर भी यदि सवर्ण समाज के एक बड़े हिस्से में असंतोष रहता है तो भाजपा के सामने विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी और सरकार को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर नाराजगी दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

भाजपा के सामने सामाजिक समीकरणों को संतुलित रखने की चुनौती

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला के अनुसार, विधान परिषद चुनाव में भाजपा को निर्णायक बढ़त नहीं मिल सकी। समाजवादी पार्टी ने लखनऊ और वाराणसी की महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ दल को चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि UGC विवाद के चलते सवर्ण मतदाताओं में नाराजगी की चर्चा भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकती है। उनके मुताबिक अमान्य मतपत्रों में UGC से जुड़े संदेश लिखे होने की बात सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हुई है।

शुक्ला ने कहा कि भाजपा एक ओर पिछड़े और दलित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर सवर्ण मतदाताओं के असंतोष को भी नजरअंदाज नहीं कर सकती। उनके अनुसार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और संघ के सामने इस मुद्दे पर संवाद स्थापित करने और नाराजगी दूर करने की चुनौती रहेगी।

विधानसभा चुनाव से पहले UGC पर रुख स्पष्ट करना होगा?

विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश में UGC विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दी है। भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटें जीती हैं, लेकिन 53,615 अमान्य मतों का आंकड़ा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

विपक्षी दल इन मतों को सरकार के प्रति नाराजगी से जोड़ रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में देख रहे हैं। हालांकि, अभी यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि कितने मतपत्रों पर UGC Roll Back लिखा गया था। इसलिए सभी अवैध मतों को किसी एक मुद्दे या राजनीतिक दल के विरोध से जोड़ना सही नहीं होगा।

अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा UGC विवाद पर क्या रुख अपनाती है और विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर उठ रहे सवालों का किस तरह जवाब देती है।

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