PM Modi Travel Expenses: PM मोदी की विदेश यात्राओं पर कितना खर्च हुआ? संसद में सरकार ने दिया पूरा हिसाब

PM Modi Travel Expenses: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च को लेकर संसद में बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को बताया कि वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विभिन्न विदेश यात्राओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित जवाब के जरिए दी गई।

सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च कई मदों में शामिल होता है, जिनमें विमान संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, आवास, स्थानीय परिवहन और आधिकारिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खर्च यात्रा की अवधि, प्रतिनिधिमंडल के आकार और मेजबान देश में आयोजित कार्यक्रमों की प्रकृति के आधार पर बदलता है।

संसद में क्या बताया गया?

विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष कई देशों का दौरा किया और इन यात्राओं पर कुल खर्च का विस्तृत ब्यौरा संसद के पटल पर रखा गया। सरकार ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति, निवेश आकर्षित करने और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने के लिए ये यात्राएं महत्वपूर्ण रही हैं।

खर्च पर क्यों उठता है सवाल?

प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च का मुद्दा समय‑समय पर विपक्ष उठाता रहा है। विपक्ष का तर्क होता है कि यात्राओं पर होने वाले खर्च और उससे देश को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ का आकलन होना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि इन दौरों से भारत को निवेश, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सहयोग के रूप में दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

FDI और कूटनीति का हवाला

सरकार ने संसद में यह भी कहा कि पिछले वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और कई रणनीतिक समझौतों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार का दावा है कि शीर्ष स्तर की कूटनीतिक यात्राओं ने भारत की वैश्विक छवि मजबूत करने और आर्थिक अवसर बढ़ाने में मदद की है।

क्या सार्वजनिक होता है पूरा खर्च?

सरकार आमतौर पर संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में विदेश यात्राओं से संबंधित व्यय का विवरण उपलब्ध कराती है। हालांकि सुरक्षा कारणों से कुछ संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च को लेकर संसद में दिए गए इस जवाब के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है, जबकि सरकार इसे भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति का हिस्सा बताकर बचाव करती रहेगी।

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