Kerala Heavy Rain: केरल में क्यों बढ़ रही है एक्सट्रीम बारिश? 124 साल के डेटा ने दिए चौंकाने वाले संकेत
केरल में पिछले कुछ वर्षों से भारी और अत्यधिक बारिश (Extreme Rainfall) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अब 124 साल के बारिश के आंकड़ों पर आधारित एक नई स्टडी ने इस बदलाव के पीछे अहम वजहों की ओर इशारा किया है। शोध के मुताबिक, राज्य में सामान्य बारिश के दिनों में कमी आई है, लेकिन कम समय में अत्यधिक बारिश होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। यही कारण है कि केरल में बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा पहले के मुकाबले अधिक हो गया है।
124 साल के आंकड़ों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने वर्ष 1901 से 2024 तक के वर्षा संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इस विश्लेषण में पाया गया कि केरल में बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले जहां बारिश लंबे समय तक समान रूप से होती थी, वहीं अब कम समय में बहुत अधिक बारिश होने लगी है। इसका असर नदियों, बांधों और शहरी इलाकों पर साफ दिखाई दे रहा है।
क्यों बढ़ रही है एक्सट्रीम बारिश?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) माना जा रहा है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ रही है। जब मानसूनी परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं तो यही अतिरिक्त नमी बेहद कम समय में मूसलाधार बारिश का कारण बनती है।
इसके अलावा अरब सागर के सतही तापमान में बढ़ोतरी भी एक अहम वजह मानी जा रही है। गर्म समुद्र अधिक जलवाष्प पैदा करता है, जिससे तेज बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
बाढ़ और भूस्खलन का बढ़ा खतरा
स्टडी में चेतावनी दी गई है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो केरल में भविष्य में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन (Landslide) की घटनाएं बढ़ सकती हैं। राज्य के पहाड़ी इलाकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका सबसे अधिक असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र में बदलाव भी स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
विशेषज्ञों ने क्या दी सलाह?
शोधकर्ताओं का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए राज्य को आपदा प्रबंधन की रणनीति में बदलाव करना होगा। इसके लिए बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और वैज्ञानिक आधार पर शहरी विकास की आवश्यकता है। साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम करना होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?
केरल उन राज्यों में शामिल है जहां मानसून का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में 124 वर्षों के आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन केवल केरल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह रिपोर्ट संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि बारिश के स्वरूप को भी तेजी से बदल रहा है।
यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में अत्यधिक बारिश से होने वाले नुकसान और बढ़ सकते हैं।



