UPI International: US-India Payment System में नया प्रयोग, डॉलर ट्रांसफर होगा और तेज?

UPI International: UPI और Zelle को जोड़ने की तैयारी के बीच अमेरिका से भारत पैसे भेजने की प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे भारतीय प्रवासियों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

UPI International: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI लगातार वैश्विक पहचान बना रहा है। अब अमेरिका और भारत के बीच धन हस्तांतरण को और आसान बनाने के लिए एक नई तकनीकी पहल पर काम किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य अमेरिकी भुगतान नेटवर्क Zelle और भारत के UPI प्लेटफॉर्म के बीच कनेक्टिविटी स्थापित करना है।

अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीयों को अपने परिवार या परिचितों के बैंक खातों में पैसा भेजने के लिए पहले से अधिक आसान विकल्प मिल सकता है।

क्या है पूरा प्रोजेक्ट?

जानकारी के अनुसार, Bank of America एक पायलट प्रोग्राम पर काम कर रहा है। इसके तहत अमेरिकी डिजिटल ट्रांसफर नेटवर्क Zelle और भारतीय UPI इकोसिस्टम को तकनीकी रूप से जोड़ने की संभावना तलाश की जा रही है।

यह पहल अभी परीक्षण चरण में है और इसके परिणामों के आधार पर आगे विस्तार का फैसला लिया जाएगा।

भारतीयों को कैसे मिलेगा फायदा?

हर साल बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अमेरिका से अपने घर पैसे भेजते हैं। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर में कई चरणों से गुजरना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने पर ट्रांसफर प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो सकती है।

विशेष रूप से छात्रों, आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिका में बसे भारतीय परिवारों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।

रेमिटेंस बाजार में अहम भूमिका

भारत दुनिया के सबसे बड़े रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है। अमेरिका से हर साल अरबों डॉलर भारत भेजे जाते हैं। ऐसे में दोनों देशों के डिजिटल भुगतान नेटवर्क को जोड़ने की कोशिश वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

क्या अमेरिका में सीधे UPI से पेमेंट कर सकेंगे?

फिलहाल इस पहल का मुख्य उद्देश्य अमेरिका से भारत धन भेजने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। अभी ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि भारतीय UPI ऐप अमेरिका में स्थानीय भुगतान के लिए उसी तरह इस्तेमाल किए जा सकेंगे जैसे भारत में होते हैं।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान के नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे ट्रांजैक्शन की गति बढ़ने के साथ-साथ लागत कम होने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल सभी की नजर इस प्रोजेक्ट के अगले चरण पर टिकी हुई है।

written by Siddhi Srivastava

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