UP Assembly Elections: UP चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद का बड़ा बयान, सपा पर साधा निशाना
UP Assembly Elections: मुजफ्फरनगर में बोले नगीना सांसद- 'वोटों का बंटवारा रोकना प्राथमिकता'; गन्ने का दाम ₹600 करने और बैलेट पेपर से चुनाव की रखी मांग।
UP Assembly Elections: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने गठबंधन और चुनावी समीकरणों को लेकर अहम बयान दिया है। मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आजाद ने कहा कि ‘इंडिया अलायंस’ के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के सभी रास्ते पूरी तरह खुले हैं और उनकी मुख्य प्राथमिकता विपक्ष के वोटों में बिखराव को रोकना है।
‘गठबंधन के दरवाजे बंद नहीं, एक महीने में साफ होगी तस्वीर’ चंद्रशेखर आजाद ने स्पष्ट किया कि राजनीति में कभी भी संभावनाएं खत्म नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “हम इंडिया अलायंस के नेताओं से लगातार कह रहे हैं कि साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं। अगर कोई साथ नहीं आता, तो आगे का फैसला तब लिया जाएगा। फिलहाल गठबंधन के सारे रास्ते खुले हुए हैं।”
आजाद ने बताया कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित राज्य भर के दलितों, पिछड़ों, मुसलमानों, किसानों और मजदूरों के बीच जाकर जमीनी माहौल को समझ रहे हैं। उन्होंने जनता से एक महीने का वक्त मांगा है, जिसके बाद वह अपनी चुनावी रणनीति का खुलासा करेंगे।
समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ संभावित समझौते के सवाल पर आजाद ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा महसूस होता है कि सपा अकेले रहकर हारना तो पसंद कर लेगी, लेकिन साथ मिलकर बीजेपी को हराना उन्हें मंजूर नहीं होगा। ऐसा वे क्यों सोचते हैं, यह तो उन्हीं से पूछा जाना चाहिए।”
किसान और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने गन्ने के दाम में मामूली बढ़ोतरी की है। जब बाजार में चीनी ₹60 प्रति किलो बिक सकती है, तो किसानों को गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल क्यों नहीं मिल सकता?”
इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जनता को मुफ्त शिक्षा, अच्छे अस्पताल और रोजगार देने से सरकार को कौन रोक रहा है?
बैलेट पेपर से चुनाव और पंचायत चुनाव पर सवाल चुनावी निष्पक्षता पर बात करते हुए उन्होंने ईवीएम (EVM) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बहाल करने के लिए चुनाव बैलेट पेपर से ही होने चाहिए।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टालने के फैसले पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जनता के आक्रोश से घबराई हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि हाईकोर्ट के तीन महीने में चुनाव कराने के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेने की कोशिश कर सकती है।



