CM Yogi Attack on SP: ‘सैफई सिंडिकेट ने युवाओं के भविष्य से खेला’, CM योगी का सपा पर हमला, बोले- पहले आवेदन कोई करता था, परीक्षा कोई और देता था और नौकरी किसी तीसरे को मिलती थी
लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के 4,543 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देते हुए योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भर्ती में धांधली और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए।
CM Yogi Attack on SP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में धांधली और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए चयनित 4,543 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में भर्ती व्यवस्था ऐसी थी कि आवेदन कोई करता था, परीक्षा कोई दूसरा देता था और नौकरी किसी तीसरे व्यक्ति को मिल जाती थी। उन्होंने इसे ‘सैफई सिंडिकेट’ का दौर बताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ऐसी व्यवस्था को समाप्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया स्थापित की है।
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब किसी के साथ भाई-भतीजावाद या भेदभाव नहीं होगा। प्रदेश के 25 करोड़ नागरिक ही उनका परिवार हैं और हर युवा को योग्यता तथा मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि क्या चयन के लिए किसी को सिफारिश लगवानी पड़ी, क्या किसी ने उनसे पैसे मांगे या लेन-देन का प्रस्ताव रखा और क्या किसी ने दबाव बनाकर नियुक्ति हासिल करने की कोशिश की?
2003 से 2017 के बीच की भर्ती व्यवस्था पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2003 से 2017 के बीच हुई भर्तियों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कई नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले आज भी न्यायालयों में लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि यदि वर्षों बाद अदालतें इन नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश देती हैं तो उन युवाओं का क्या होगा, जिन्होंने लंबे समय तक नौकरी की है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भर्ती प्रक्रिया में बेईमानी करके युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, उनकी संपत्ति जब्त की जानी चाहिए। योगी ने दावा किया कि 2017 में सरकार बनने के बाद ही यह तय कर लिया गया था कि सभी भर्तियां पारदर्शी तरीके से होंगी और किसी भी स्तर पर सिफारिश या भेदभाव को जगह नहीं मिलेगी।
साढ़े नौ साल में 9.5 लाख से अधिक सरकारी भर्तियों का दावा
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों का आंकड़ा रखते हुए कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस बल में करीब 2.30 लाख पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती की गई है। वहीं, विभिन्न सरकारी विभागों में कुल भर्तियों की संख्या 9.5 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2003 से 2017 के बीच 14 साल में भी उतनी भर्तियां नहीं हुईं, जितनी मौजूदा सरकार ने साढ़े नौ वर्षों में की हैं।
योगी ने बताया कि सरकार ने पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग विभागों के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए हैं। 25 अगस्त को कृषि विभाग के 3,572 अधिकारियों, 19 सितंबर को आयुष, चिकित्सा स्वास्थ्य और उद्यान विभाग के 818 कर्मचारियों, 20 सितंबर को पुलिस विभाग के 912 अभ्यर्थियों, 22 सितंबर को शिक्षा विभाग के 3,567 और 28 सितंबर को पंचायती राज विभाग के 1,375 कार्मिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।
इसके अलावा 8 अक्टूबर को 470 मेधावी खिलाड़ियों को पुलिस में नियुक्ति दी गई और 5 नवंबर को 28 फॉरेंसिक साइंटिस्ट्स को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। अब पुलिस विभाग में चयनित 4,543 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।
42 हजार होमगार्ड और 32 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी
मुख्यमंत्री ने आगे की भर्तियों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद भैयादूज के अगले दिन राजस्व विभाग के 1,200 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसके साथ ही 42 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस में 32 हजार कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की भर्ती प्रक्रिया भी पूरी हो गई है और फिलहाल सत्यापन का काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि करीब 25 हजार शिक्षकों के नियुक्ति पत्र वितरण के लिए भी समय मांगा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक युवाओं को पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति पत्र देना सरकार की कोई कृपा या अनुकंपा नहीं, बल्कि युवाओं को अवसर देना उसका कर्तव्य है।
यूपी की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब नौ-दस साल पहले उत्तर प्रदेश की पहचान खराब कानून-व्यवस्था, कर्फ्यू, दंगों और अराजकता से जुड़ गई थी। देश की सबसे बड़ी आबादी और युवा कार्यबल होने के बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था तथा बुनियादी ढांचा कमजोर स्थिति में था। योगी के मुताबिक, 2017 में सरकार बनने के समय कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी संसाधनों की कमी थी, जबकि आज प्रदेश की आर्थिक क्षमता में काफी सुधार हुआ है।
उन्होंने महिला कार्यबल की भागीदारी में तीन गुना बढ़ोतरी का दावा करते हुए लखनऊ के एचसीएल टेक परिसर का उदाहरण दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 में वहां लगभग 100 लोग काम करते थे, जबकि अब कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 12,500 हो गई है। नई सुविधाओं के शुरू होने से छह हजार और लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 18,500 तक पहुंच जाएगी।
योगी ने कहा कि अब महिलाएं रात की शिफ्ट में भी काम कर रही हैं और देर रात अपने घर लौट रही हैं। उन्होंने बताया कि एचसीएल में काम करने वाली कई महिलाएं उन्नाव, बाराबंकी, सीतापुर और हरदोई जैसे जिलों से आती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
पुलिसकर्मियों की सुविधाओं और प्रशिक्षण क्षमता में विस्तार
मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में बुनियादी सुविधाओं के विकास का जिक्र करते हुए अपने पुराने निरीक्षण का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 2017 में पुलिस लाइन का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने एक जर्जर बैरक में दो पुलिसकर्मियों को आराम करते देखा था। वहां चारपाई टूटी हुई थी और छत की हालत भी खराब थी। उसी समय पुलिसकर्मियों के आवास और सुविधाओं को बेहतर बनाने का निर्णय लिया गया।
योगी के मुताबिक, आज प्रदेश के 56 जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक बहुमंजिला आवासीय भवन बनाए गए हैं। पहले पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता एक समय में करीब छह हजार जवानों की थी, जिसे बढ़ाकर अब 60 हजार तक कर दिया गया है। इसके अलावा यूपी स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स और आपदा प्रबंधन के लिए यूपी एसडीआरएफ का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के समय समाप्त की गई पीएसी की 54 कंपनियों को फिर से संगठित कर मजबूत किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने के लिए भी व्यवस्था का विस्तार हुआ है। पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने थे, जबकि अब प्रत्येक जिले में एक साइबर थाना और हर पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क मौजूद है। प्रदेश के सात जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली भी लागू की गई है।
अपराधियों के खिलाफ सख्ती और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की भूमिका को लेकर कहा कि कानून-व्यवस्था मजबूत होने के साथ पुलिस का आम लोगों के प्रति संवेदनशील होना भी जरूरी है। गरीब, पीड़ित और वंचित व्यक्ति जब अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो उसकी बात सहानुभूति के साथ सुनी जानी चाहिए। वहीं, अपराधी और माफिया कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून से बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस की असली पहचान तभी बनेगी, जब आम नागरिक उसके पास खुद को सुरक्षित महसूस करे और उसे न्याय मिलने का भरोसा हो। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त उपनिरीक्षकों से भी इसी भावना के साथ काम करने की अपील की।
नए कानूनों, साइबर सुरक्षा और AI की भी मिलेगी ट्रेनिंग
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवनियुक्त उपनिरीक्षकों को परंपरागत पुलिस प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। उन्हें तीन नए आपराधिक कानूनों, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण केंद्र तैयार किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उपनिरीक्षक जिस भी विभाग या विंग में तैनात हों, वहां अपनी कार्यशैली और व्यवहार से नई पहचान बनाएं। पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है और हर पुलिसकर्मी को इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
धनतेरस पर 4,543 युवाओं को नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री ने धनतेरस के अवसर पर नियुक्ति पत्र वितरण को युवाओं और उनके परिवारों के लिए खास मौका बताया। उन्होंने कहा कि दीपावली से पहले हजारों परिवारों के घरों में खुशियां पहुंचाने का अवसर मिला है। जब ये युवा अपनी प्रतिभा, मेहनत और ऊर्जा के साथ प्रदेश की सेवा करेंगे, तो इसका लाभ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को भी मिलेगा।
योगी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियुक्तियां करना नहीं, बल्कि युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार अवसर देना है। उन्होंने नवनियुक्त उपनिरीक्षकों से ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की।



