BCCI: एक रन की गड़बड़ी पर विवाद, झारखंड ने BCCI से की शिकायत

BCCI: उत्तराखंड से एक रन से हारने के बाद झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने स्कोरिंग में चूक का आरोप लगाया, 29.4 ओवर की घटना पर उठाए सवाल

BCCI:  क्रिकेट के मैदान पर एक रन का अंतर भी जीत और हार का फैसला कर सकता है। लेकिन जब इसी एक रन को लेकर स्कोरिंग पर सवाल उठने लगें, तो विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला अंडर-19 महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में सामने आया है, जहां उत्तराखंड के खिलाफ एक रन से हारने के बाद झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (JCA) ने आधिकारिक स्कोरिंग में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

मंगलवार को नागपुर में झारखंड और उत्तराखंड की अंडर-19 महिला टीमों के बीच मुकाबला खेला गया था। आधिकारिक स्कोरकार्ड के मुताबिक, उत्तराखंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 134 रन बनाए, जबकि लक्ष्य का पीछा करने उतरी झारखंड की टीम 133 रन पर सिमट गई। इस तरह झारखंड को एक रन से हार मिली और टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

हालांकि, झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन का दावा है कि मुकाबले के दौरान स्कोर दर्ज करने में गलती हुई थी। एसोसिएशन ने इस संबंध में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से शिकायत की है। उसका कहना है कि एक रन सही तरीके से जोड़ा जाता, तो मैच का नतीजा अलग हो सकता था।

उत्तराखंड से हार के बाद स्कोरिंग पर सवाल

मैच के बाद झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने स्कोरकार्ड और मुकाबले के दौरान हुई एक घटना को लेकर आपत्ति जताई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, JCA ने अपनी शिकायत में कहा कि मैच के दौरान बल्लेबाजों ने एक रन पूरा कर लिया था, लेकिन वह रन आधिकारिक स्कोर में शामिल नहीं किया गया।

एसोसिएशन के मुताबिक, इसी वजह से झारखंड का स्कोर वास्तविक स्थिति से एक रन कम दर्ज हुआ। हालांकि, यह एसोसिएशन का दावा है और उपलब्ध जानकारी में आधिकारिक स्कोरिंग रिकॉर्ड के आधार पर इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

29.4 ओवर में रन आउट की घटना का जिक्र

झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने शिकायत में 29.4 ओवर में हुई घटना को विवाद की मुख्य वजह बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, उस गेंद पर बल्लेबाजों ने दूसरा रन लेने की कोशिश की और इसी दौरान एक बल्लेबाज रन आउट हो गया।

JCA का आरोप है कि बल्लेबाज पहला रन पूरा कर चुके थे, लेकिन आधिकारिक स्कोरर ने रन आउट को दर्ज करते समय उस रन को स्कोर में नहीं जोड़ा। एसोसिएशन का कहना है कि यदि पूरा किया गया रन स्कोर में शामिल होता, तो झारखंड की टीम का कुल स्कोर 134 रन हो सकता था और मुकाबला टाई हो सकता था।

इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित गेंद पर रन किस तरह दर्ज किए गए थे और आधिकारिक स्कोरबुक में क्या विवरण मौजूद है। अंतिम स्थिति मैच के रिकॉर्ड और अधिकारियों की रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगी।

आखिरी गेंद पर भी बना रहा रोमांच

मैदान पर लगे स्कोरबोर्ड के अनुसार, झारखंड को आखिरी गेंद पर दो रन की जरूरत थी। बल्लेबाज एक रन ही पूरा कर सके। झारखंड के खिलाड़ियों को लगा कि मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ है, लेकिन आधिकारिक परिणाम में टीम को एक रन से हारा हुआ घोषित किया गया।

इसके बाद झारखंड की टीम के कुछ सदस्यों ने आधिकारिक स्कोरर से इस बारे में बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, मैदान पर कुछ देर तक बहस भी हुई, लेकिन घोषित परिणाम में बदलाव नहीं हुआ।

एक रन से हार का अंतर बेहद कम होने के कारण स्कोरिंग से जुड़ा सवाल झारखंड के लिए अहम बन गया। टीम के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद एसोसिएशन ने मामले को औपचारिक रूप से उठाने का फैसला किया।

BCCI से शिकायत, जांच पर नजर

झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने स्कोरिंग में कथित गलती को लेकर BCCI से शिकायत की है। एसोसिएशन का पक्ष है कि जिस रन को पूरा किया गया था, उसे स्कोर में शामिल किया जाना चाहिए था। इसी आधार पर मैच के स्कोर और परिणाम की जांच का मुद्दा उठाया गया है।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में BCCI की ओर से शिकायत पर दिए गए जवाब या किसी अंतिम फैसले का विवरण नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मैच के अधिकारियों ने स्कोरिंग संबंधी आपत्ति पर कोई औपचारिक रिपोर्ट तैयार की है या नहीं।

ऐसे मामलों में गेंद-दर-गेंद रिकॉर्ड, आधिकारिक स्कोरबुक और मैच अधिकारियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि स्कोरिंग में चूक हुई थी या नहीं और उसका परिणाम पर क्या असर पड़ा।

एक रन से बदला टूर्नामेंट का सफर

क्रिकेट में एक रन की अहमियत इस मुकाबले के नतीजे से साफ दिखाई देती है। आधिकारिक स्कोरकार्ड के अनुसार झारखंड को एक रन से हार मिली, जबकि एसोसिएशन का दावा है कि स्कोरिंग की कथित गलती के कारण यह अंतर बना।

फिलहाल विवाद का केंद्र 29.4 ओवर में हुई रन आउट की घटना और उस दौरान रन दर्ज करने का तरीका है। BCCI या संबंधित मैच अधिकारियों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि झारखंड की शिकायत में उठाए गए सवालों पर क्या निष्कर्ष निकलता है।

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