Rajya Sabha Election: ‘क्या यही PDA है…’, राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर मायावती का सपा पर हमला, परिवारवाद और पूंजीपतियों का लगाया आरोप

मायावती ने रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी को लेकर सपा पर परिवारवाद और पूंजीपतियों को तरजीह देने का आरोप लगाया।

Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने सपा और उसके PDA की राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावों में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के समर्थन की बात करती है, लेकिन टिकट देने के मामले में परिवार और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता देती है।

सपा ने 30 सितंबर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। पार्टी ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है।

मायावती ने PDA को लेकर साधा निशाना

मायावती ने सपा के उम्मीदवारों के चयन को लेकर कहा कि उनकी पार्टी चुनावों में परिवारवाद और धनबल का सहारा नहीं लेती। उन्होंने दावा किया कि बसपा अपने संगठन में काम करने वाले गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों से जुड़े कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर देती है।

सपा पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि एक तरफ पार्टी खुद को समाजवादी और PDA की पार्टी बताती है, जबकि दूसरी तरफ उसके उम्मीदवारों के चयन में परिवार और पूंजीपतियों की भूमिका दिखाई देती है। मायावती ने सवाल उठाया कि क्या यही PDA की राजनीति है।

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी को राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है।

रामगोपाल यादव के नाम पर भी सवाल

मायावती ने अपने बयान में रामगोपाल यादव के दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने रामगोपाल यादव को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का करीबी रिश्तेदार बताते हुए इसे परिवारवाद से जोड़ा।

रामगोपाल यादव सपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं। वह पहले भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और पार्टी ने इस बार उन्हें फिर से उच्च सदन के लिए उम्मीदवार बनाया है।

मायावती का तर्क है कि सपा एक तरफ PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की राजनीतिक भागीदारी की बात करती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के परिवार और प्रभावशाली लोगों को जगह मिलती है।

धनराज नाथवानी की उम्मीदवारी पर भी हमला

मायावती ने सपा के दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को लेकर भी सवाल उठाए। धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी और खेल प्रशासक हैं। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी भी राज्यसभा सांसद हैं।

धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सपा के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा पैदा की है। उनकी पृष्ठभूमि पारंपरिक राजनीतिक राजनीति से अलग है और वह कॉरपोरेट तथा खेल प्रशासन से जुड़े रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनकी उम्मीदवारी सपा के लिए एक अलग तरह का चयन है।

मायावती ने इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाकर सपा पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी बड़े पूंजीपतियों को भी चुनावी राजनीति में मौका देती है।

तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी तंज

मायावती ने सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह केवल ‘फेस सेविंग’ के लिए उतारा जा सकता है और उसका उद्देश्य चुनाव हारने तक सीमित हो सकता है।

हालांकि, सपा की ओर से उत्तर प्रदेश के लिए रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी के दो नाम आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं। तीसरे उम्मीदवार को लेकर मायावती की टिप्पणी उनके राजनीतिक आकलन के रूप में सामने आई है।

राज्यसभा चुनाव के गणित में भी इस बार उत्तर प्रदेश की सीटें महत्वपूर्ण हैं। राज्य की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है और एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोटों की जरूरत होगी। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतार रही है।

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2027 के चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी

राज्यसभा चुनाव के बहाने यूपी की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की छाया भी दिखाई दे रही है। मायावती ने अपने बयान में दलित, आदिवासी, अति-पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक वर्गों के साथ गरीब सवर्ण समाज के लोगों से बसपा से जुड़ने की अपील की।

वहीं सपा लगातार PDA को अपनी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर मायावती का हमला आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच राजनीतिक खींचतान को भी सामने लाता है।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सपा के दोनों उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं और 16 अक्टूबर को मतदान होना है। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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