Himanta Biswa Sarma on Rahul Gandhi: ‘सोनिया जी राहुल को PM बनाना चाहती थीं, लेकिन…’ हिमंत सरमा का तंज, बोले- मॉक पार्लियामेंट में ही बनेंगे प्रधानमंत्री

9 नवंबर को मध्याह्न भोग आरती के बाद से 10 नवंबर की सप्तऋषि आरती तक टिकट बुकिंग नहीं होगी, लेकिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन जारी रहेंगे।

Himanta Biswa Sarma on Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। इस बार निशाने पर विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम रहा। सरमा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कई कोशिशें कीं, लेकिन जब ऐसा नहीं हो सका तो मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर मॉक पार्लियामेंट आयोजित कर ली गई।

हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी नकली संसद में प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन देश की असली संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहेंगे। उनके इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

सोनिया गांधी का नाम लेकर राहुल पर निशाना

गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सोनिया गांधी की इच्छा थी कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके लिए कई प्रयास भी किए गए, लेकिन उनकी कोशिशें सफल नहीं हुईं। सरमा के मुताबिक, इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास के लॉन में मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया गया, जहां राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की भूमिका में दिखाया गया।

उन्होंने कहा कि मॉक पार्लियामेंट में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन वास्तविक संसद में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे। सरमा का यह बयान विपक्ष के उस कार्यक्रम पर सीधा राजनीतिक कटाक्ष था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्रवाई की गई थी।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रतीकात्मक महाभियोग

दरअसल, INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में एक प्रतीकात्मक ‘पब्लिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया था। यह कार्यक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच हुआ।

विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके पद से हटाए जाने की मांग की है।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों का उल्लेख करते हुए प्रतीकात्मक प्रस्ताव पारित किया। राहुल गांधी ने भी इस मौके पर कहा था कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर पीछे नहीं हटेगा।

क्या था मॉक पार्लियामेंट का मकसद?

विपक्ष ने इस आयोजन को चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को सार्वजनिक रूप से सामने रखने का माध्यम बताया था। INDIA गठबंधन के नेताओं का कहना है कि उन्होंने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन उनके नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। इसके बाद विपक्ष ने प्रतीकात्मक रूप से सार्वजनिक महाभियोग की कार्यवाही आयोजित की।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खरगे के आवास पर हुआ कार्यक्रम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत वास्तविक महाभियोग नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। किसी प्रतीकात्मक प्रस्ताव से उन्हें पद से नहीं हटाया जा सकता।

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SIR और वोट चोरी के आरोपों पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस

SIR को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

दूसरी ओर, भाजपा विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताती रही है। हिमंत बिस्वा सरमा का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक टकराव की कड़ी माना जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम को निशाना बनाकर राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पर कटाक्ष किया।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मॉक पार्लियामेंट के आयोजन को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साध चुके हैं। ऐसे में साफ है कि चुनाव आयोग, SIR और कथित वोट चोरी का मुद्दा अब केवल संस्थागत बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा विषय बन चुका है।

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