business update: Gold-Silver Import पर सरकार की सख्ती! GST काउंसिल की बैठक से बदल सकते हैं नियम
business update: कीमती धातुओं के आयात पर मिल रही टैक्स राहत खत्म करने का प्रस्ताव चर्चा में, बाजार और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ सकता है प्रभाव
business update: देश में सोना और चांदी के कारोबार से जुड़े नियमों में जल्द बदलाव देखने को मिल सकता है। 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में एक ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है, जो कीमती धातुओं के आयात की मौजूदा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। प्रस्ताव के तहत बैंकों और सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियों को मिलने वाली IGST राहत समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
फिलहाल इन संस्थाओं को सोना, चांदी और प्लैटिनम आयात के दौरान विशेष कर छूट का लाभ मिलता है। यदि यह सुविधा वापस ली जाती है, तो आयात प्रक्रिया की लागत बढ़ सकती है और इसका असर पूरे बुलियन कारोबार पर दिखाई दे सकता है।
क्यों हो रही है नियमों की समीक्षा?
सरकार का मानना है कि आयात से जुड़ी कर व्यवस्था सभी खिलाड़ियों के लिए समान होनी चाहिए। वर्तमान में कुछ संस्थानों को मिलने वाली विशेष छूट के कारण अलग-अलग आयात चैनलों के बीच टैक्स का अंतर बना हुआ है। नई व्यवस्था के जरिए इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
इसके अलावा सरकार कीमती धातुओं के बढ़ते आयात पर भी नजर बनाए हुए है। भारत में सोने की मांग लगातार ऊंची बनी हुई है, जिसके कारण बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में आयात व्यवस्था को और संतुलित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
आयात के आंकड़े क्या बताते हैं?
हाल के महीनों में देश में सोने का आयात बढ़ा है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सोने की विदेशी खरीद अरबों डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है। चांदी के आयात में कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर कीमती धातुओं की मांग मजबूत बनी हुई है।
यही वजह है कि सरकार टैक्स ढांचे और आयात नीति की दोबारा समीक्षा कर रही है, ताकि राजस्व और व्यापार दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्ताव मंजूर होने पर आयातकों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं होगा कि बाजार में सोना या चांदी तुरंत उसी अनुपात में महंगे हो जाएंगे। कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, आयात शुल्क, निवेश मांग और घरेलू खरीदारी जैसे कई कारकों से तय होती हैं।
हालांकि लंबी अवधि में अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है, जिससे आभूषण और बुलियन की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
पहले भी बढ़ाए जा चुके हैं शुल्क
सरकार इससे पहले भी सोना और चांदी के आयात को नियंत्रित करने के लिए शुल्क में बढ़ोतरी कर चुकी है। आयात शुल्क बढ़ाने के फैसलों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना और घरेलू आर्थिक संतुलन बनाए रखना रहा है।
अब उद्योग जगत और निवेशकों की नजर 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर टिकी है। बैठक में लिया गया फैसला आने वाले समय में सोना-चांदी के व्यापार और कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।



