cooking oil price: त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगड़ सकता है, खाने के तेल के दाम फिर बढ़ने के संकेत

cooking oil price: बढ़ती आयात लागत, वैश्विक बाजार में तेजी और कमजोर रुपये के कारण खाद्य तेल की कीमतों में 7-8% तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में छठ, दशहरा और दिवाली से पहले आम लोगों की रसोई का बजट और प्रभावित होने की आशंका है।

cooking oil price: दशहरा, छठ पूजा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में रौनक बढ़ने लगती है और लोगों की खरीदारी तेज हो जाती है। लेकिन इस बार त्योहारों से पहले महंगाई आम लोगों की चिंता बढ़ा सकती है। पहले ही प्याज, चीनी और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब खबर है कि खाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की कीमतों में भी जल्द बढ़ोतरी हो सकती है।

उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में खाद्य तेल के दाम 7 से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो रसोई का मासिक बजट और अधिक प्रभावित होगा। खासकर उन परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा, जहां रोजमर्रा के भोजन में खाद्य तेल का अधिक उपयोग होता है।

आयात पर निर्भरता बन रही बड़ी वजह

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिखाई देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में वैश्विक बाजार में कच्चे खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है। जब आयात लागत बढ़ती है तो कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ता है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।

मार्च के बाद तीसरी बार बढ़ सकते हैं दाम

खाद्य तेल कंपनियां इस साल पहले ही दो बार कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। मार्च और जून के बीच कई ब्रांडों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए थे। इन बढ़ोतरी के कारण खाद्य तेल की कीमतों में कुल मिलाकर 10 से 12 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ था।

अब यदि कंपनियां एक बार फिर कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि करती हैं तो मार्च से अब तक कुल बढ़ोतरी 18 से 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यानी कुछ ही महीनों में उपभोक्ताओं को खाद्य तेल के लिए पहले की तुलना में काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

किन तेलों की लागत बढ़ी?

बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यही तीनों तेल भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं।

पाम ऑयल की लागत में सालाना आधार पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल भी पहले की तुलना में महंगे हुए हैं। इन तेलों की ऊंची कीमतों का असर रिफाइनिंग कंपनियों और तेल उत्पादकों पर पड़ रहा है।

बढ़ी ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस लागत

सिर्फ कच्चे तेल की कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई और बीमा खर्च भी बढ़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर तनाव और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण शिपिंग कॉस्ट में इजाफा हुआ है।

इसके अलावा आयातित माल पर लगने वाला कुल खर्च बढ़ने से कंपनियों की लागत और अधिक बढ़ गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचेंगे।

त्योहारों के दौरान बढ़ सकता है असर

दशहरा, छठ और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। मिठाई, नमकीन, स्नैक्स और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में बड़ी मात्रा में तेल का उपयोग होता है।

ऐसे में यदि खाद्य तेल महंगा होता है तो इसका असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई और खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों की लागत भी बढ़ेगी, जिससे कई उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं। त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार पर भी रहेगी नजर

बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्य तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो सरकार आयात शुल्क में राहत या अन्य उपायों पर विचार कर सकती है। इससे कीमतों को नियंत्रित करने में कुछ मदद मिल सकती है।

हालांकि फिलहाल कोई बड़ा फैसला सामने नहीं आया है और बाजार की नजर वैश्विक परिस्थितियों पर बनी हुई है।

आगे क्या हैं संकेत?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ सप्ताह खाद्य तेल बाजार के लिए अहम रहेंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी नहीं आती और रुपये पर दबाव बना रहता है, तो घरेलू बाजार में खाद्य तेल महंगा हो सकता है।

फिलहाल उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की नजर बाजार की दिशा पर है। त्योहारों से पहले यदि कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर लाखों परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है। ऐसे में महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के लिए यह एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।

Related Articles