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Soybean Oil Price: खाने-पीने की बढ़ती महंगाई के बीच अब खाद्य तेल की कीमतें भी आम लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। बीते एक साल में तेल के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में केंद्र सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए आयात शुल्क में कमी जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ा है। विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में तेल की मांग बढ़ने से कीमतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से पूरा करता है। पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात कई देशों से किया जाता है। वैश्विक बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने और उत्पादन संबंधी चुनौतियों के कारण कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार खाद्य तेलों पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती की संभावना पर चर्चा कर रही है। माना जा रहा है कि इससे बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, सरकार घरेलू तिलहन उत्पादकों के हितों को भी ध्यान में रख रही है ताकि किसानों को किसी तरह का नुकसान न हो।
आने वाले महीनों में नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार हैं। इन अवसरों पर खाद्य तेल की खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। इसलिए सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने के उपाय तलाश रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में कमी का असर बाजार तक पहुंचने में समय लग सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव भी घरेलू बाजार को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को खाद्य तेल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

