Gig Workers: गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए केंद्र की पहल, सरकार ने गठित किया नया बोर्ड

Gig Workers: Swiggy, Zomato और Uber-Ola से जुड़े कामगारों के लिए पीएफ और बीमा जैसी योजनाओं पर होगा विचार

Gig Workers: देश में ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने नई पहल की है। श्रम मंत्रालय ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड ऐसे कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और सरकार को जरूरी सुझाव देने का काम करेगा।

इस पहल के दायरे में Swiggy, Zomato, Uber और Ola जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवर भी आएंगे। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य उन कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का रास्ता तैयार करना है, जिन्हें पारंपरिक नौकरी की तरह नियमित कर्मचारी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।

गिग वर्कर्स को भविष्य निधि (PF), बीमा और दूसरी कल्याणकारी सुविधाएं देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब सरकार ने इस दिशा में नीतिगत सुझाव देने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाई है। हालांकि, बोर्ड के गठन के साथ ही इन कामगारों को पीएफ या इंश्योरेंस का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है।

मनसुख मंडाविया करेंगे बोर्ड की अध्यक्षता

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया करेंगे। बोर्ड को गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की जरूरतों का आकलन करने तथा उनके लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई है।

बोर्ड यह भी देखेगा कि प्रस्तावित योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जा सकते हैं और उनके खर्च की व्यवस्था किस तरह की जाए। इसके अलावा योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी से जुड़े पहलुओं पर भी सरकार को सुझाव दिए जाएंगे।

इस व्यवस्था से सरकार को अलग-अलग श्रेणियों के कामगारों की जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप सामाजिक सुरक्षा का ढांचा तैयार करने में मदद मिल सकती है।

बोर्ड में सरकार से लेकर कंपनियों तक की भागीदारी

इस बोर्ड में केवल सरकारी अधिकारियों को ही शामिल नहीं किया गया है, बल्कि कंपनियों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है। इसका उद्देश्य नीति निर्माण में सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

बोर्ड की संरचना में शामिल होंगे:

  • केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि
  • बड़ी कंपनियों के पांच प्रतिनिधि
  • श्रमिकों के पांच प्रतिनिधि
  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के प्रतिनिधि
  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के प्रतिनिधि
  • सिविल सोसाइटी के सदस्य
  • श्रमिक संगठनों और यूनियनों के प्रतिनिधि

इन सदस्यों के माध्यम से कामगारों की समस्याओं, कंपनियों की भूमिका और सरकारी योजनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा सकेगी।

साल में तीन बार बैठक कर सरकार को देगा सुझाव

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में गिग वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

बोर्ड सरकार को सुझाव देगा कि किन कामगारों को किस तरह की सहायता की जरूरत है। इसके साथ ही योजनाओं के लिए धन जुटाने, बजट निर्धारित करने और उनके प्रभाव का आकलन करने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

इसका काम केवल योजनाओं की सिफारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके क्रियान्वयन और निगरानी से जुड़े पहलुओं पर भी सुझाव देना होगा। फिलहाल सरकार ने किसी नई पीएफ या बीमा योजना की शुरुआत की घोषणा नहीं की है। आगे मिलने वाली सुविधाओं का स्वरूप सरकारी फैसलों और जारी किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत बना बोर्ड

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस संहिता का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनों को एक व्यापक कानूनी ढांचे में लाना है।

इस कानून में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल करने का प्रावधान किया गया है। मूल खबर के मुताबिक, पहले के नौ सामाजिक सुरक्षा कानूनों को मिलाकर यह संहिता तैयार की गई थी।

अब इसी कानूनी ढांचे के तहत गठित बोर्ड इन श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लेकर सरकार को सलाह देगा। इससे उन कामगारों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म या स्वतंत्र रूप से काम करते हैं।

क्या होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?

गिग वर्कर्स ऐसे लोग होते हैं, जो किसी एक संस्थान में स्थायी नौकरी करने के बजाय अलग-अलग काम या प्रोजेक्ट के आधार पर कमाई करते हैं। वे अपनी सुविधा और उपलब्धता के अनुसार काम चुन सकते हैं। फ्रीलांसर और स्वतंत्र पेशेवर इसके उदाहरण हैं।

वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे कामगार होते हैं, जो ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम हासिल करते हैं। Swiggy और Zomato के डिलीवरी पार्टनर्स तथा Uber और Ola के ड्राइवर इसी श्रेणी में आते हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए काम मिलने के कारण इनकी रोजगार व्यवस्था पारंपरिक नौकरी से अलग होती है। कई बार इनकी कमाई काम की उपलब्धता, ऑर्डर की संख्या और काम के घंटों पर निर्भर करती है। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना या काम बंद होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा की जरूरत और बढ़ जाती है।

पीएफ और बीमा का लाभ कब से मिलेगा?

सरकार की इस पहल के बाद गिग वर्कर्स के बीच पीएफ और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सी योजना लागू होगी, किन कामगारों को उसका लाभ मिलेगा और इसके लिए पात्रता की शर्तें क्या होंगी।

बोर्ड इन विषयों पर सरकार को सुझाव देगा। इसके बाद योजनाओं को मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि Swiggy, Zomato, Uber और Ola से जुड़े सभी कामगारों को पीएफ और बीमा मिलना शुरू हो गया है।

गिग इकोनॉमी में काम करने वालों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

देश में ऑनलाइन फूड डिलीवरी, कैब बुकिंग और दूसरी ऐप आधारित सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। ये कामगार शहरी परिवहन, डिलीवरी और डिजिटल सेवाओं को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके बावजूद सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन से इन मुद्दों पर चर्चा और नीतिगत सुझाव देने के लिए एक मंच तैयार हुआ है।

अब इस पहल का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर सरकार कौन-सी योजनाएं बनाती है और उन्हें किस तरह लागू करती है।

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