Farooq Abdullah: ‘पाकिस्तान भला J&K का शुभचिंतक कैसे?’, फारूक अब्दुल्ला के बयान पर BJP का पलटवार, दिलीप घोष बोले- अब नहीं चलेगी पुरानी राजनीति

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाता है। दिलीप घोष और रविंदर रैना ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

Farooq Abdullah: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहता है और इसी वजह से कश्मीरियों के हितों की बात दुनिया तक पहुंचती है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा कि कुछ नेता लोगों को बांटकर राजनीति करते आए हैं, लेकिन अब देश बदल चुका है और जनता विकास चाहती है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के बीजेपी नेता रविंदर रैना ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं, वह वहां के लोगों का शुभचिंतक कैसे हो सकता है? इस बयानबाजी के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर पाकिस्तान, आतंकवाद और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है।

दिलीप घोष ने फारूक अब्दुल्ला पर क्या कहा?

बीजेपी नेता दिलीप घोष ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब लोग आतंकवाद नहीं, बल्कि शांति और विकास चाहते हैं। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों के साथ विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

घोष ने आरोप लगाया कि कुछ नेता लंबे समय से लोगों को बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं ने 50 से 60 वर्षों तक इसी तरह की राजनीति की है, लेकिन अब जनता की प्राथमिकताएं बदल रही हैं।

दिलीप घोष ने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को उसकी ओर देखने के बजाय जम्मू-कश्मीर के विकास पर ध्यान देना चाहिए। बीजेपी नेता के मुताबिक, क्षेत्र में विकास और लोगों की खुशहाली ही प्राथमिकता होनी चाहिए।

हालांकि, घोष की ये टिप्पणियां बीजेपी के राजनीतिक रुख को दर्शाती हैं। जम्मू-कश्मीर की स्थिति और विकास को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे और दृष्टिकोण हैं।

रविंदर रैना ने पूछा- पाकिस्तान कश्मीरियों का शुभचिंतक कैसे?

बीजेपी नेता रविंदर रैना ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और हिंसा के कारण क्षेत्र के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

रैना ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराने में भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के लोगों का शुभचिंतक कैसे बताया जा सकता है।

बीजेपी नेता ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पाकिस्तान की भूमिका का आकलन करते समय जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा के इतिहास को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रैना की प्रतिक्रिया से साफ है कि बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान की कथित आतंकवाद समर्थक भूमिका से जोड़कर उठा रही है। दूसरी ओर, फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने को अपने बयान का आधार बनाया है।

फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को लेकर क्या कहा था?

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार, 24 अक्टूबर को बारामूला में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया के अलग-अलग मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाता रहता है और इसी कारण यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय चर्चा में बना हुआ है।

फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने अधिकारों और पहचान के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो उनकी पहचान प्रभावित हो सकती है।

अपने भाषण में उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश लगातार दुनिया के सामने यह बात रखता है कि कश्मीर का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने से केंद्र सरकार पर दबाव बना रहता है।

उनके इसी बयान को लेकर विवाद शुरू हुआ। बीजेपी नेताओं ने इसे पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक रुख के तौर पर देखा और सवाल उठाया कि दशकों से आतंकवाद की समस्या से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में पाकिस्तान को रक्षक के रूप में कैसे पेश किया जा सकता है। कश्मीर मुद्दे पर बीजेपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के विचार अलग

फारूक अब्दुल्ला का बयान ऐसे समय आया है, जब जम्मू-कश्मीर की राजनीति में केंद्र सरकार की नीतियों, क्षेत्र की पहचान और राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 से जुड़े अपने राजनीतिक रुख को लेकर आवाज उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

वहीं, बीजेपी केंद्र सरकार के फैसलों का समर्थन करती रही है और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय एकीकरण, सुरक्षा तथा विकास को अपनी प्राथमिकताओं में गिनाती है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा करते समय वहां से जुड़े आतंकवाद और सीमा पार हिंसा के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस तरह फारूक अब्दुल्ला के बयान पर उठा विवाद केवल पाकिस्तान के संदर्भ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जम्मू-कश्मीर के भविष्य, केंद्र सरकार की नीतियों और क्षेत्र के लोगों के अधिकारों को लेकर दोनों दलों के अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आ रहे हैं।

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बयानबाजी के बीच विकास और सुरक्षा पर बहस

फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। दिलीप घोष ने जहां इसे पुरानी राजनीतिक शैली से जोड़ते हुए विकास पर ध्यान देने की बात कही, वहीं रविंदर रैना ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए।

दूसरी ओर, फारूक अब्दुल्ला का तर्क है कि कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए जाने से क्षेत्र के लोगों के हितों की चर्चा बनी रहती है। उनके बयान और बीजेपी की प्रतिक्रिया के बीच मूल सवाल यही है कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य, सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों को लेकर किस तरह की नीति अपनाई जानी चाहिए।

फिलहाल इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है, यह विभिन्न दलों की आगे की प्रतिक्रिया और क्षेत्र से जुड़े प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

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