नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर भड़के महंत राजू दास, बोले- ‘शूर्पणखा जैसी महिला’; जानिए पूरा विवाद
नेहा बोरा के ‘बांग्लादेश ने क्रांति का रास्ता दिखाया’ बयान पर महंत राजू दास ने आपत्ति जताई। जानिए क्या है पूरा विवाद।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश को लेकर दिए गए बयान पर विवाद बढ़ गया है। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने नेहा बोरा पर तीखी टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना रामायण की पात्र शूर्पणखा से कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहा बोरा भारत की सनातन संस्कृति को तोड़ने वाली बातें कर रही हैं। उनका यह बयान नेहा बोरा के उस वक्तव्य के बाद आया है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश को क्रांति का रास्ता दिखाने वाला बताया था।
महंत राजू दास ने नेहा बोरा पर क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में महंत राजू दास ने नेहा बोरा के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “नेहा बोरा शुद्ध रूप से ऐसी महिला है जैसी शूर्पणखा थी। पूरे राक्षसों के खानदान का सर्वनाश कर दिया। वही नेहा बोरा है। बांग्लादेश के बारे में बात कर रही हैं। कितनी दुर्भाग्य की बात है।”
राजू दास ने अपनी टिप्पणी में नेहा बोरा के बयान को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, शूर्पणखा से तुलना और उससे जुड़ी टिप्पणी महंत राजू दास की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है।
धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा का भी किया जिक्र
महंत राजू दास ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी यात्रा में शामिल युवा हिंदुओं को जोड़ने, जातिगत कुरीतियों को खत्म करने और भारत को एकजुट करने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक तरफ ऐसे युवा हैं, जो समाज को जोड़ने की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ कुछ लोग सनातन संस्कृति को तोड़ने और भारत के टुकड़े करने जैसी बातें कर रहे हैं। राजू दास ने ऐसे लोगों को ‘जेन-जी’ मानने पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ युवाओं को बड़े राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल है, जिसके कारण देश में इस तरह का माहौल बन रहा है। ये आरोप महंत राजू दास ने लगाए हैं।
बांग्लादेश और भारत की तुलना पर जताई आपत्ति
महंत राजू दास ने बांग्लादेश के हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने छात्र आंदोलन के नाम पर बने माहौल पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इसके दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत की परिस्थितियों को एक जैसा मानकर नहीं देखा जा सकता। राजू दास ने नेहा बोरा और वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों की बांग्लादेश संबंधी टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई।
उनकी टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर था कि बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम को भारत में राजनीतिक बदलाव या विरोध प्रदर्शनों के लिए उदाहरण के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
नेहा बोरा ने बांग्लादेश को लेकर क्या कहा था?
उपलब्ध खबर के मुताबिक, 14 अक्टूबर को नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर एक संदेश दिया था। इसमें उन्होंने कहा था, “बांग्लादेश ने हमें क्रांति का रास्ता दिखाया।”
इसी बयान को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस शुरू हुई। महंत राजू दास ने इसे भारत की परिस्थितियों और सनातन संस्कृति से जोड़कर इसकी आलोचना की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में नेहा बोरा के बयान का पूरा संदर्भ और उनका विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है, इसलिए उनके वक्तव्य की मंशा पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
क्यों बढ़ रहा है विवाद?
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश में विरोध प्रदर्शनों, शासन परिवर्तन से जुड़ी टिप्पणियों और बांग्लादेश के घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। नेहा बोरा के बयान को कुछ लोग क्रांति और जनआंदोलन के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि महंत राजू दास जैसे आलोचक इसे भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ने पर आपत्ति जता रहे हैं।
फिलहाल, महंत राजू दास की तीखी टिप्पणी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। आगे विवाद किस दिशा में बढ़ता है, यह नेहा बोरा या उनके संगठन की प्रतिक्रिया और इस बयान पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट होगा।



