NCERT Course: मिडिल स्कूल टीचर्स के लिए सुनहरा मौका, NCERT शुरू करेगा 40 सप्ताह का ऑनलाइन कोर्स
NCERT Course: NCERT का नया ऑनलाइन कार्यक्रम विज्ञान शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीक और विषय की गहरी समझ विकसित करने का अवसर देगा।
NCERT Course: विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शिक्षकों के लिए एक नया ऑनलाइन डिप्लोमा प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है जो कक्षा 6 से 8 तक विज्ञान विषय पढ़ाते हैं।
“डिप्लोमा इन टीचिंग ऑफ साइंस एट मिडिल स्टेज” नामक इस कोर्स का उद्देश्य शिक्षकों को विज्ञान विषयों की बेहतर समझ देने के साथ-साथ नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना है। कार्यक्रम पूरी तरह डिजिटल मोड में संचालित होगा, जिससे देशभर के शिक्षक घर बैठे इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
कब से शुरू होंगे आवेदन?
NCERT के अनुसार इस कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी 12 नवंबर 2026 तक रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। चयनित प्रतिभागियों के लिए कक्षाएं 16 नवंबर से शुरू की जाएंगी।
किन उम्मीदवारों को मिलेगा मौका?
इस कार्यक्रम में कार्यरत शिक्षक, बीएससी स्नातक, शिक्षा में डिग्री या डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी तथा शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे प्री-सर्विस उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अन्य पेशेवर भी इस कोर्स का हिस्सा बन सकते हैं।
40 सप्ताह तक चलेगा प्रशिक्षण
कोर्स की कुल अवधि 40 सप्ताह निर्धारित की गई है। इसमें 40 अलग-अलग मॉड्यूल शामिल किए गए हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। प्रतिभागियों को हर सप्ताह लगभग 6 से 8 घंटे अध्ययन करना होगा।
कोर्स के दौरान विज्ञान के कई महत्वपूर्ण विषयों जैसे ऊर्जा, बल, गति, धातु-अधातु, अम्ल-क्षार, तापमान और ऊष्मा पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को डिजिटल टूल्स और प्रभावी लेसन प्लानिंग की जानकारी भी दी जाएगी।
कितनी देनी होगी फीस?
इस ऑनलाइन डिप्लोमा कार्यक्रम में दाखिले के लिए प्रतिभागियों को 2000 रुपये की एकमुश्त फीस जमा करनी होगी। प्रत्येक मॉड्यूल के बाद मूल्यांकन होगा और सभी मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल मिडिल स्कूल स्तर पर विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने और शिक्षकों की पेशेवर दक्षता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।



