Vaibhav Sooryavanshi: वैभव को लगातार मौके क्यों नहीं मिल रहे? गौतम गंभीर ने बताया- कब तक करना होगा इंतजार

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की अच्छी फॉर्म के बावजूद उन्हें हर मैच में प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिल रही। गौतम गंभीर ने टीम चयन और वैभव के इंतजार की वजह बताई है।

Vaibhav Sooryavanshi: भारतीय क्रिकेट में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का नाम तेजी से चर्चा में आया है। बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले वैभव ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया है कि उनमें बड़े स्तर पर खेलने की क्षमता है। इसके बावजूद हाल के मुकाबलों में उन्हें हर मैच में प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिली।

इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठते रहे हैं कि जब वैभव फॉर्म में हैं तो उन्हें लगातार मौके क्यों नहीं दिए जा रहे। अब भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इस सवाल पर टीम मैनेजमेंट का पक्ष स्पष्ट किया है।

गंभीर ने बताया- वैभव को क्यों करना पड़ा इंतजार?

गौतम गंभीर ने कहा कि वैभव अच्छी फॉर्म में होने के बावजूद ऐसे खिलाड़ियों के बीच टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले काफी समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।

गंभीर के मुताबिक उन्होंने खुद वैभव से इस बारे में बातचीत की थी और उन्हें समझाया कि क्रिकेट में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को हर मैच में मौका मिलना जरूरी नहीं है। कई बार टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की जरूरतों के कारण युवा खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर प्लेइंग-11 तय नहीं होती। टीम मैनेजमेंट का फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि किसी खास मुकाबले में कौन सा संयोजन टीम को जीत दिलाने के लिए सबसे बेहतर हो सकता है।

प्लेइंग-11 में सबसे अहम है टीम का संतुलन

गंभीर ने समझाया कि टीम में किसी खिलाड़ी को शामिल करना सिर्फ उसकी प्रतिभा या मौजूदा फॉर्म का सवाल नहीं है। इसके साथ यह भी देखना पड़ता है कि उसके आने से टीम का मौजूदा संतुलन किस तरह प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में मौजूद खिलाड़ियों के प्रदर्शन, कप्तान और कोच की सोच तथा मैच की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अंतिम एकादश तय की जाती है।

वैभव के मामले में भी यही स्थिति है। अगर उन्हें प्लेइंग-11 में शामिल किया जाता है तो किसी ऐसे खिलाड़ी को बाहर बैठाना पड़ेगा जिसने पिछले डेढ़ से दो साल में टीम के लिए लगातार योगदान दिया है। इसलिए सिर्फ एक युवा खिलाड़ी की अच्छी फॉर्म के आधार पर लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ी को अचानक बाहर करना आसान फैसला नहीं है।

अभिषेक या संजू को बाहर करना आसान नहीं

गंभीर ने इस बात का भी संकेत दिया कि वैभव को खिलाने के लिए टीम में मौजूद किसी स्थापित खिलाड़ी को बाहर करना पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वैभव खेलते हैं तो अभिषेक शर्मा या संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी को बाहर बैठाना पड़ सकता है।

टीम मैनेजमेंट के लिए यह फैसला इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि इन खिलाड़ियों ने लंबे समय तक टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। गंभीर के मुताबिक तीन-चार मैचों में असफल रहने के बाद ऐसे खिलाड़ियों को बाहर कर देना सही संदेश नहीं देगा।

युवा प्रतिभा को मौका देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ टीम में खिलाड़ियों के बीच भरोसा और सुरक्षा का माहौल बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गंभीर इसी संतुलन पर जोर देते नजर आए।

वैभव ने कम उम्र में बनाए कई बड़े रिकॉर्ड

वैभव सूर्यवंशी की चर्चा सिर्फ उनकी कम उम्र की वजह से नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उतरते ही कई रिकॉर्ड अपने नाम किए।

इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करते हुए वैभव 15 साल और 99 दिन की उम्र में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। इस मामले में उन्होंने सचिन तेंदुलकर के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 15 साल और 118 दिन की उम्र में पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया। इन उपलब्धियों के बाद उनसे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के बड़े सितारे के तौर पर उम्मीदें बढ़ गईं।

एशियाड में भी दिखाया दम

एशियाई खेलों के दौरान भी वैभव को हर मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला। अफगानिस्तान सीरीज और एशियाड से पहले जापान के खिलाफ मुकाबले में वह प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे।

हालांकि श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में वापसी करते हुए उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में 38 रन की तेज पारी खेली। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में उन्होंने नौ गेंदों पर 15 रन बनाए।

भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और अपना खिताब बरकरार रखा। इस उपलब्धि के साथ वैभव ने एक और रिकॉर्ड बनाया। 15 साल, छह महीने और छह दिन की उम्र में वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बने। उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ा।

Supreme Court: CEC ज्ञानेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अंतरिम कार्रवाई से इनकार; चुनाव आयोग को नोटिस, फॉर्म-6 में बदलाव पर भी सवाल

तो आखिर वैभव को कब तक करना होगा इंतजार?

गौतम गंभीर की बातों से साफ है कि वैभव को टीम मैनेजमेंट की नजरों से बाहर नहीं किया गया है। बल्कि उनके लिए सही समय और सही टीम संयोजन का इंतजार किया जा रहा है।

वैभव की उम्र अभी बेहद कम है और उनके सामने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबा करियर है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट शायद उन्हें जल्दबाजी में लगातार खिलाने के बजाय धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव के लिए तैयार करना चाहता है।

फिलहाल गंभीर का संदेश यही है कि प्रतिभा अपनी जगह है, लेकिन भारतीय टीम की प्लेइंग-11 सिर्फ सोशल मीडिया की मांग या किसी एक खिलाड़ी की लोकप्रियता से तय नहीं होगी। वैभव को भी उन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की जरूरतों का सम्मान करते हुए अपनी अगली बारी का इंतजार करना होगा। अगर वह इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले समय में उनके लिए टीम में नियमित जगह बनाने के रास्ते खुल सकते हैं।

Related Articles