the vvan movie: ‘द वन’ की कहानी के पीछे बिहार का यह प्राचीन मंदिर, 400 साल पुरानी मान्यता ने खींचा लोगों का ध्यान
the vvan movie: पटना के पास स्थित मां वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथाओं और रहस्यमयी मान्यताओं ने फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' की कहानी को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
the vvan movie: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म की कहानी जितनी दिलचस्प है, उससे जुड़ा वास्तविक प्रेरणास्रोत भी उतना ही खास माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि फिल्म का मूल विचार बिहार के एक प्राचीन मंदिर और उससे जुड़ी लोककथाओं से प्रभावित है।
यह मंदिर मां वन देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है, जो बिहार के पटना जिले के बिहटा क्षेत्र में स्थित है। वर्षों से यह स्थान स्थानीय लोगों की आस्था और रहस्यमयी मान्यताओं का केंद्र बना हुआ है।
400 साल पुराना बताया जाता है मंदिर
मां वन देवी मंदिर को क्षेत्र का एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसकी स्थापना करीब 350 से 400 वर्ष पहले हुई थी। यहां देवी की पूजा किसी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र पिंड के रूप में की जाती है।
मंदिर के आसपास का इलाका पहले घने जंगलों से घिरा हुआ था, जिसके कारण इस स्थान का नाम वन देवी मंदिर पड़ गया।
भक्त के सपने से शुरू हुई कहानी
लोककथाओं के मुताबिक, रघोपुर निवासी विद्यानंद मिश्रा मां विंध्यवासिनी के अनन्य भक्त थे। कहा जाता है कि बढ़ती उम्र के कारण उनके लिए विंध्याचल जाना कठिन हो गया था। इसी दौरान देवी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर अपनी शक्ति का प्रतीक गांव में स्थापित करने का निर्देश दिया।
इसके बाद उन्होंने जंगल क्षेत्र में एक पवित्र पिंड की स्थापना की और वहीं पूजा-अर्चना शुरू की। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध होता गया।
झोपड़ी से बना भव्य धार्मिक स्थल
शुरुआत में पूजा एक साधारण झोपड़ी में होती थी। समय बीतने के साथ यहां भक्तों की संख्या बढ़ी और यह स्थान मंदिर के रूप में विकसित हो गया। आज भी यहां की पूजा-पद्धति अपनी पुरानी परंपराओं से जुड़ी हुई है।
सूर्यास्त के बाद मंदिर से जुड़ी खास मान्यता
मां वन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक यह है कि सूर्यास्त के बाद मंदिर और आसपास के जंगल में जाने से लोग परहेज करते हैं। स्थानीय कथाओं में इस परंपरा का उल्लेख मिलता है और इसे वर्षों से माना जाता रहा है।
इसी रहस्य और लोकविश्वास ने इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दी है।
फिल्म निर्माताओं को कैसे मिला आइडिया?
फिल्म के निर्माण से पहले लेखकों और क्रिएटिव टीम ने मंदिर से जुड़ी लोककथाओं और मान्यताओं पर अध्ययन किया था। जंगल, देवी और रहस्य से जुड़े किस्सों ने फिल्म की कहानी को नई दिशा दी।
स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान मिली जानकारियों को बाद में सिनेमाई रूप दिया गया। यही वजह है कि फिल्म में लोककथा और रहस्य का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।
आस्था से सिनेमा तक का सफर
मां वन देवी मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि अब यह फिल्म प्रेमियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। ‘द वन’ के जरिए बिहार की एक स्थानीय लोककथा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गई है।



