UP Election 2027: एनडीए में सीटों का ‘सियासी घमासान’, बीजेपी के छोटे सहयोगियों की लंबी हुई मांग

UP Election 2027: अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद, जयंत चौधरी और ओम प्रकाश राजभर का दबाव; 403 सीटों के एनडीए गणित में फंसा पेच।

UP Election 2027:  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही समय बाकी हो, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अगुवाई वाले एनडीए (NDA) कुनबे में सीटों का गणित सुलझाना अभी से पेचीदा होता दिख रहा है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, गठबंधन के छोटे-बड़े दल अपनी सियासी जमीन मजबूत करने और विधानसभा में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए बीजेपी आलाकमान पर सीटों का दबाव बनाने लगे हैं।

पुराने सहयोगियों की नई मांगें और बदलता गणितसाल 2022 के विधानसभा चुनाव के समय एनडीए के पाले में सिर्फ अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी खड़ी थीं। हालांकि, अब राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हुए जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के आ जाने से इस बार टिकटों और सीटों का समीकरण बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

किस दल का क्या है प्लान?

  • अपना दल (एस) की नजर 35 सीटों पर: पिछले चुनाव में 18 में से 12 सीटें जीतने वाली अनुप्रिया पटेल इस बार 30 से 35 सीटों की दावेदारी की तैयारी में हैं। पार्टी लगातार सोनभद्र, लखनऊ, मऊ और घाटमपुर जैसे क्षेत्रों में सम्मेलन आयोजित कर अपना जनाधार दिखा रही है।

  • निषाद पार्टी का आरक्षण दांव: पार्टी प्रमुख डॉ. संजय निषाद अपनी दावेदारी को मजबूती देने के लिए निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल कराने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं। दिल्ली के सम्मेलनों के जरिए वे बीजेपी नेतृत्व को कड़ा संदेश दे चुके हैं।

  • आरएलडी का पश्चिमी यूपी से आगे विस्तार: 2022 में 33 सीटों पर लड़ने वाली आरएलडी अब सिर्फ जाट बहुल सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती। जयंत चौधरी आगरा, अलीगढ़, हाथरस और मथुरा जैसे इलाकों में रैलियां कर अपना दायरा बढ़ाने में जुटे हैं।

  • सुभासपा की पूर्वांचल में घेराबंदी: ओम प्रकाश राजभर पूर्वांचल की दर्जन भर से अधिक सीटों पर दावेदारी ठोक कर अपनी पार्टी का कद मजबूत करने की फिराक में हैं।

बीजेपी के सामने संतुलित फॉर्मूला निकालने की चुनौतीउत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों पर अपने ही प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के साथ-साथ चारों सहयोगियों को संतुष्ट रखना बीजेपी के लिए एक कठिन इम्तिहान की तरह है। क्षेत्रीय समीकरणों, जिताऊ उम्मीदवारों और सहयोगियों की महत्वाकांक्षा के बीच पार्टी कैसे राह निकालती है, इसी पर 2027 में एनडीए के एकजुट प्रदर्शन का दारोमदार रहेगा।

Related Articles