sensex crash: IRDAI के प्रस्ताव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1200 अंक से ज्यादा टूटा; निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये डूबे
sensex crash: बीमा वितरण नियमों में बदलाव के प्रस्ताव के बाद बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में भारी बिकवाली, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में।
sensex crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1200 अंकों से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। बाजार में आई इस कमजोरी का सबसे बड़ा कारण बीमा नियामक IRDAI का एक नया प्रस्ताव माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
IRDAI ने बीमा वितरण व्यवस्था में बदलाव के लिए एक प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बीमा उत्पादों की बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, ग्राहकों पर अनावश्यक बीमा थोपने की प्रवृत्ति को रोकना और वितरण लागत को कम करना है।
इसके अलावा, प्रस्ताव में कमीशन ढांचे की समीक्षा और बीमा बिक्री से जुड़े कुछ विवादित तरीकों पर रोक लगाने की बात भी कही गई है। हालांकि, बाजार को आशंका है कि इन बदलावों का असर बीमा कंपनियों, ब्रोकर प्लेटफॉर्म और बैंकों की कमाई पर पड़ सकता है।
वित्तीय शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
नए प्रस्ताव की खबर सामने आते ही निवेशकों ने वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी। बैंकिंग, फिनटेक और इंश्योरेंस सेक्टर के कई बड़े शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
सबसे अधिक दबाव उन कंपनियों पर देखा गया जिनका कारोबार बीमा वितरण या उससे जुड़े कमीशन मॉडल पर निर्भर है। इसके चलते कई प्रमुख कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
1.12 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू घटी
बाजार में आई इस गिरावट का असर 12 प्रमुख वित्तीय कंपनियों पर सबसे ज्यादा पड़ा। इन कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
बजाज फाइनेंस, PB फिनटेक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कई बीमा कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। वहीं HDFC Life, ICICI Prudential Life और अन्य बीमा कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों की नजर अब आगे की कार्रवाई पर
फिलहाल बाजार की नजर IRDAI की अगली प्रक्रिया पर टिकी हुई है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रस्तावित बदलाव अंतिम रूप में लागू होते हैं या उनमें संशोधन किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियामकीय स्पष्टता आने तक वित्तीय और बीमा क्षेत्र के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।



