UPI News: डिजिटल इंडिया के बीच नकदी की चमक बरकरार, 42 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा कैश
UPI News: डिजिटल ट्रांजेक्शन में तेजी के बावजूद देश में नकदी का चलन बढ़ रहा है, RBI के आंकड़ों ने बदलती भुगतान आदतों की नई तस्वीर पेश की है।
UPI News: भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। मोबाइल फोन और UPI ने भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब सड़क किनारे ठेले से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के अंत तक देश में चलन में मौजूद नकदी बढ़कर 42.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.5 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि डिजिटल भुगतान के विस्तार के बावजूद लोग नकदी को क्यों नहीं छोड़ रहे हैं।
लोगों की पहली पसंद अब भी नकदी
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ने के बाद भी नकदी की उपयोगिता खत्म नहीं हुई है। कई लोग छोटे और बड़े दोनों तरह के लेनदेन के लिए नकद राशि अपने पास रखना पसंद करते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे व्यवसायों में आज भी नकदी का महत्व बना हुआ है।
ग्रामीण भारत में कैश का मजबूत आधार
देश के कई हिस्सों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच सीमित है। ऐसे क्षेत्रों में नकद भुगतान ही सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। इसके अलावा बुजुर्ग नागरिक और छोटे व्यापारी भी नकदी के जरिए लेनदेन को ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।
RBI अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान का विस्तार हो रहा है, लेकिन कैश की जरूरत अभी भी बड़ी आबादी के लिए बनी हुई है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा UPI
दूसरी ओर UPI की लोकप्रियता लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। अगस्त 2026 में UPI ट्रांजेक्शन की संख्या में सालाना आधार पर 22.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, कुल लेनदेन मूल्य में लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
इससे साफ है कि लोग डिजिटल भुगतान को तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन साथ ही नकदी का उपयोग भी जारी है। यही कारण है कि दोनों माध्यम समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
MDR की चर्चा ने बढ़ाई दिलचस्पी
हाल ही में बड़े UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू होने की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है। यदि ऐसा होता है, तो कुछ कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ बढ़ सकता है। इसके चलते बाजार में यह बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में कुछ बड़े भुगतान फिर से नकद माध्यम की ओर लौट सकते हैं।
क्या कहता है मौजूदा ट्रेंड?
ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान और नकदी दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। UPI ने भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन नकदी की उपयोगिता अभी भी बरकरार है। फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था में दोनों माध्यम साथ-साथ आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।



