Police Commemoration Day 2026: ‘नक्सलवाद के अभिशाप से देश को मुक्ति’, अमित शाह बोले- इसका श्रेय बहादुर जवानों को

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद किया।

Police Commemoration Day 2026: राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। बुधवार, 21 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शहीद जवानों के योगदान को याद किया। इस दौरान शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 को देश को दशकों से चली आ रही इस समस्या से मुक्ति मिल गई। उन्होंने इसके लिए सुरक्षा बलों के बलिदान को श्रेय दिया।

कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में पुलिस तथा सुरक्षा बलों की अहम भूमिका रही है। उनके मुताबिक, जवानों के बलिदान की बदौलत ही देश ने सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता बनाया है। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।

पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कर्तव्य पालन करते हुए जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को पुष्पचक्र अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सेवाओं में से एक है। पुलिसकर्मी त्योहारों और अन्य विशेष अवसरों पर भी अपनी ड्यूटी निभाते हैं, जबकि आम लोग अपने परिवारों के साथ समय बिताते हैं।

शाह ने कहा कि जब देश के लोग त्योहार मनाते हैं, तब पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और यातायात संभालने में जुटे रहते हैं। कई बार उन्हें लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहकर काम करना पड़ता है। उन्होंने इसे राष्ट्र के प्रति समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

गृह मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में काम किया है। उनके अनुसार, आंतरिक सुरक्षा से लेकर सीमाओं की सुरक्षा तक जवानों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

‘31 मार्च 2026 को नक्सलवाद से मुक्ति मिली’

नक्सलवाद के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 देश की पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। उन्होंने दावा किया कि इसी तारीख को देश को दशकों से परेशान कर रहे नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्ति मिली।

शाह ने कहा कि 1981 से नक्सलवाद ने देश के कई जिलों में गहरे घाव दिए और इस संघर्ष में सुरक्षाकर्मियों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों की भी जान गई। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि यहां सुरक्षा बलों को लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

गृह मंत्री के मुताबिक, नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में 3,600 से अधिक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने 13,700 से अधिक नागरिकों की मौत का भी उल्लेख किया। शाह ने कहा कि इन बलिदानों को भुलाया नहीं जा सकता और शहीद जवानों के परिवारों के प्रति पूरा देश कृतज्ञ है।

‘जवानों के बलिदान से देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा’

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि देश की सुरक्षा और विकास के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा बलों ने दशकों तक कठिन परिस्थितियों में काम नहीं किया होता, तो देश की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति अलग हो सकती थी।

उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके अपनों का बलिदान देश के लिए महत्वपूर्ण रहा है। शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में जवानों के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को अपनी प्रमुख सुरक्षा प्राथमिकताओं में गिनाती रही है। मार्च 2026 में संसद में भी वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा हुई थी।

नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए मोटरसाइकिल रैली रवाना

पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में अमित शाह ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान से जुड़ी मोटरसाइकिल रैली को भी हरी झंडी दिखाई। इस रैली में विभिन्न राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 90 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

‘नशे के खिलाफ लड़ाई’ विषय पर आयोजित इस रैली का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रैली में शामिल पुलिसकर्मी 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर पहुंचेंगे और वहां एकता परेड में हिस्सा लेंगे।

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क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?

भारत में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने के लिए समर्पित है।

21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उन्हीं की स्मृति में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन देशभर में पुलिस बलों और सुरक्षा संगठनों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीद जवानों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन कठिन परिस्थितियों की भी याद दिलाता है, जिनमें पुलिसकर्मी देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए काम करते हैं। कार्यक्रम में अमित शाह ने जवानों के इसी समर्पण को रेखांकित करते हुए उनके बलिदान और उनके परिवारों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

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