PM Modi: मन की बात में पीएम मोदी ने किया दिवाली और छठ पूजा का जिक्र, स्वदेशी उत्पादों और साफ-सफाई पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें एपिसोड में स्वच्छता, स्वदेशी खरीदारी और बेहतर पैकेजिंग की अहमियत बताई। पूर्णिया के मखाने, कलबुर्गी की अरहर दाल और आदिवासी उत्पादों का भी किया जिक्र।
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में दिवाली और छठ पूजा का जिक्र करते हुए लोगों से त्योहारों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना मजबूत हो रही है और लोग खरीदारी करते समय भारतीय उत्पादों को महत्व दे रहे हैं। पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच, बेहतर पैकेजिंग और आदिवासी समुदायों के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
त्योहारों के साथ स्वच्छता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि त्योहारों के मौसम में देश में बदलाव की झलक साफ दिखाई देती है। दिवाली और छठ पूजा जैसे पर्वों से पहले कई जगहों पर साफ-सफाई के अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों को अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
पीएम मोदी ने कहा कि जहां हम रहते हैं, वहां साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। छोटे-छोटे प्रयास भी आसपास के वातावरण में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। त्योहारों के दौरान घरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ स्वच्छता को नियमित आदत बनाने का संदेश भी उनके संबोधन का हिस्सा रहा।
दिवाली को रोशनी और उत्साह का पर्व माना जाता है, जबकि छठ पूजा बिहार और पूर्वांचल सहित कई क्षेत्रों में विशेष आस्था के साथ मनाई जाती है। इन त्योहारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी को उत्सवों से जोड़ने पर जोर दिया।
‘वोकल फॉर लोकल’ से भारतीय उत्पादों को मिल रहे नए बाजार
मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि त्योहारों के मौसम में खरीदारी के तौर-तरीकों में बदलाव दिखाई दे रहा है। लोग अब स्वदेशी उत्पादों को अधिक महत्व देने लगे हैं। उनके मुताबिक, ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को देश से बाहर के बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है।
प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह भारतीय किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुल रहे हैं।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का उद्देश्य केवल देश में बनी चीजों की खरीद तक सीमित नहीं है। इससे किसानों, छोटे कारोबारियों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमों को भी लाभ मिल सकता है। जब स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो उनके उत्पादन, प्रसंस्करण और बिक्री से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं।
प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों पर खरीदारी करते समय भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। उनके संबोधन में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश को भी प्रमुखता मिली।
उत्पाद की गुणवत्ता के साथ पैकेजिंग भी अहम
पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पादों की चर्चा के दौरान पैकेजिंग के महत्व पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी पैकेजिंग भी उतनी ही मायने रखती है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, बाजार में कई बार लोग किसी चीज को उसकी आकर्षक पैकेजिंग देखकर उठाते हैं और फिर उसके बारे में जानकारी हासिल करते हैं। ऐसे में उत्पाद की प्रस्तुति ग्राहकों का ध्यान खींचने और उसे बाजार में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि इस जरूरत को समझते हुए अब उत्पादों की पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बेहतर पैकेजिंग से स्थानीय उत्पादों को बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और अधिक ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को जापान का गुड डिजाइन अवॉर्ड
प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए ‘शबरी नेचुरल्स’ के उत्पादों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और पारंपरिक शैली की झलक देखने को मिलती है।
पीएम मोदी ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। उन्होंने इसे स्थानीय कला, रचनात्मकता और उत्पादों की बेहतर प्रस्तुति से जोड़कर पेश किया।
इस उदाहरण के जरिए प्रधानमंत्री ने बताया कि पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से तैयार उत्पाद भी आधुनिक डिजाइन और प्रभावी पैकेजिंग के सहारे व्यापक पहचान हासिल कर सकते हैं। इससे आदिवासी समुदायों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और उनकी सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का अवसर मिलता है।
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स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री का संदेश स्वच्छता, स्वदेशी खरीदारी, बेहतर पैकेजिंग और स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन देने के इर्द-गिर्द रहा। दिवाली और छठ पूजा के संदर्भ में उन्होंने त्योहारों को साफ-सफाई और जिम्मेदार खरीदारी से जोड़ने की बात कही।
पूर्णिया के मखाने से लेकर कलबुर्गी की अरहर दाल और महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों तक के उदाहरणों के जरिए उन्होंने स्थानीय उत्पादों की बढ़ती पहुंच का जिक्र किया। संबोधन में यह भी रेखांकित किया गया कि गुणवत्ता और पैकेजिंग पर ध्यान देकर भारतीय उत्पादों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहचान दिलाई जा सकती है।



