Opposition Protest: SIR पर आर-पार की तैयारी में विपक्ष, आकाशवाणी से राजघाट तक प्रदर्शन के बाद आज कहां बनेगी रणनीति?
इंडिया गठबंधन के सांसद संविधान सदन में बैठक कर आगे के प्रदर्शन पर चर्चा कर सकते हैं। विपक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात का समय मांगा है।
Opposition Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन का विरोध लगातार तेज हो रहा है। चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च से शुरू हुआ प्रदर्शन जंतर-मंतर और राजघाट तक पहुंच चुका है। अब विपक्ष अपनी अगली रणनीति बनाने में जुटा है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसदों की बैठक संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक, सांसद दोपहर 3 बजे यहां जुटकर आगे के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा कर सकते हैं।
इसी बीच विपक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय भी मांगा है। ऐसे में सवाल है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे विपक्षी सांसद अब कौन-सा कदम उठाने जा रहे हैं? क्या उनका अगला पड़ाव राष्ट्रपति भवन होगा या वे किसी अन्य स्थान पर विरोध दर्ज कराएंगे?
आज कहां प्रदर्शन कर सकता है विपक्ष?
सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विरोध जताने के लिए विपक्ष कई संभावित स्थानों पर प्रदर्शन कर सकता है। इनमें सेवा तीर्थ, राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति का आवास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के आवास शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, इन स्थानों पर प्रदर्शन करने की अंतिम योजना को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल विपक्षी सांसदों की बैठक और राष्ट्रपति से मुलाकात की संभावनाओं के बीच आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, लगातार हो रहे प्रदर्शनों से साफ है कि इंडिया गठबंधन इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रमुख मुद्दा बनाए रखना चाहता है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए कब मांगा गया था समय?
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को बताया था कि इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए अनुरोध किया है और राष्ट्रपति भवन से जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
वेणुगोपाल के मुताबिक, राष्ट्रपति से मिलने के लिए पहला पत्र 2 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे। विपक्ष की ओर से 5 अक्टूबर को नामों के साथ दोबारा अनुरोध भेजा गया और 7, 8 या 9 अक्टूबर को मुलाकात का समय देने की मांग की गई।
उन्होंने कहा था कि गुरुवार तक विपक्ष को जवाब नहीं मिला था और शुक्रवार तक इंतजार करने की बात कही गई थी। अब राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर आगे की गतिविधियां अहम हो गई हैं। यदि बैठक होती है, तो विपक्ष SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रख सकता है।
राजघाट पर धरना देकर विपक्ष ने क्या संदेश दिया?
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 8 अक्टूबर को महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर धरना दिया था। इससे पहले विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले थे। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। अगले दिन भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने से रोका।
राजघाट पर विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची में बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन पर संबंधित पक्षों का रुख अलग है।
विपक्षी नेताओं ने यह भी संकल्प जताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस रुख से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में भी SIR को लेकर राजनीतिक टकराव जारी रह सकता है।
SIR के खिलाफ आंदोलन की पहले से बन रही थी योजना
पिछले सप्ताह इंडिया गठबंधन ने SIR विवाद पर संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने की बात कही थी। इसमें जनसभाओं और लोकतंत्र बचाओ मार्च जैसे कार्यक्रमों को शामिल करने की चर्चा हुई थी। मौजूदा प्रदर्शन इसी व्यापक विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
विपक्षी दलों की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि संस्थाओं में अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है और उसके आदेश कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।
इस विवाद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार दबाव बना रहा है, जबकि आयोग ने अपने फैसलों का बचाव किया है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
SIR को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट भी चर्चा में रही। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्तियां उठाई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों और आदेशों पर थीं।
इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। आयोग ने जवाब में कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और विचार चर्चा का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके आदेशों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।
अब आगे क्या करेगा इंडिया गठबंधन?
शुक्रवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में प्रस्तावित बैठक और राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। संभावित प्रदर्शन स्थलों को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन अंतिम कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
फिलहाल, इंडिया गठबंधन SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार तथा चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहा है। अब देखना होगा कि विपक्ष का अगला कदम राष्ट्रपति से मुलाकात तक सीमित रहता है या दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का दायरा और बढ़ता है।



