Insurance Rules: बीमा सेक्टर में सख्ती की तैयारी, एजेंट कमीशन और पॉलिसी बिक्री के नियम बदल सकता है IRDAI

Insurance Rules: बीमा कंपनियों के खर्च, मिस-सेलिंग और लोन के साथ बीमा बेचने की प्रथा पर नियामक ने नए प्रस्ताव पेश किए हैं।

Insurance Rules: देश के बीमा क्षेत्र में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंटों के कमीशन और पॉलिसी बिक्री प्रणाली को लेकर कई अहम प्रस्ताव जारी किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य ग्राहकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना और बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना है।

बीमा नियामक का मानना है कि कंपनियों के बढ़ते खर्च और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियमों का मसौदा तैयार किया गया है।

कंपनियों के खर्च पर होगी कड़ी निगरानी

IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के परिचालन खर्च को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है। वहीं जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए भी खर्च की गणना के मानकों में बदलाव का सुझाव दिया गया है।

नियामक का मानना है कि इससे बीमा कंपनियां अधिक जिम्मेदारी के साथ खर्च करेंगी और ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष वित्तीय बोझ कम होगा।

हर पॉलिसी पर अलग हो सकता है कमीशन

नए प्रस्तावों के अनुसार सभी बीमा उत्पादों के लिए एक समान कमीशन व्यवस्था लागू नहीं होगी। इसके बजाय पॉलिसी की अवधि, श्रेणी और बिक्री में लगने वाले प्रयासों के आधार पर कमीशन तय किया जा सकता है।

इस कदम से कमीशन ढांचे को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाने की कोशिश की जा रही है।

हेल्थ और मोटर बीमा में भी बदलाव की तैयारी

IRDAI ने हेल्थ इंश्योरेंस और मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के लिए भी नए दिशा-निर्देश सुझाए हैं। विशेष रूप से मोटर थर्ड-पार्टी बीमा में डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन को सीमित करने का प्रस्ताव सामने आया है।

वहीं हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों की नई बिक्री और रिन्यूअल के लिए अलग-अलग कमीशन मॉडल लागू करने की बात कही गई है।

लोन के साथ बीमा खरीदने की मजबूरी खत्म हो सकती है

कई ग्राहकों की शिकायत रहती है कि लोन लेते समय उन्हें बीमा पॉलिसी भी खरीदनी पड़ती है। IRDAI ने इस व्यवस्था पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा बैंक और NBFC कर्मचारियों को केवल बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देने की प्रथा पर भी अंकुश लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

गलत पॉलिसी बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

बीमा क्षेत्र में मिस-सेलिंग लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। इसे रोकने के लिए नियामक ने पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को संबंधित पॉलिसी से जोड़ने का सुझाव दिया है। यदि किसी मामले में गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेचने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति का कमीशन वापस लिया जा सकता है।

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो ग्राहकों को बीमा खरीदते समय अधिक स्पष्ट जानकारी मिलेगी। साथ ही, अनावश्यक खर्चों में कमी, पारदर्शी कमीशन व्यवस्था और मिस-सेलिंग पर नियंत्रण से बीमा क्षेत्र में भरोसा बढ़ सकता है। आने वाले समय में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम नियम जारी किए जा सकते हैं।

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