India: मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात पर भारत की चिंता, UN में उठाया भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
India: राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई, GCC देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को बताया अहम प्राथमिकता
India: मध्य पूर्व में जारी तनाव और व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में क्षेत्रीय स्थिति पर आयोजित खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि मध्य पूर्व की शांति और स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने और हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल प्रयास करने की अपील की।
हरीश ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ये लोग संबंधित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी योगदान देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, भलाई और हितों की रक्षा भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव और संघर्ष का बढ़ना चिंता का विषय है, क्योंकि इसका असर आम नागरिकों, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
भारत ने अपने वक्तव्य में आम नागरिकों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हाल के दिनों में हुए हमलों की कड़ी निंदा की। हरीश ने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई है। उन्होंने रियाद में मारे गए भारतीय नागरिक मोहम्मद यूसुफ अली का उल्लेख करते हुए इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई। भारत का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हिंसा को रोकना बेहद जरूरी है।
सऊदी अरब की संप्रभुता के समर्थन में भारत
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने सऊदी अरब के प्रति अपना समर्थन भी स्पष्ट किया। पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि भारत सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के मुद्दे पर वहां की सरकार और जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने क्षेत्र में जारी तनाव के बीच सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
हरीश के मुताबिक, मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह तनाव कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाए। भारत ने विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया। भारत का दृष्टिकोण है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सैन्य टकराव बढ़ाने के बजाय संवाद के रास्ते तलाशे जाने चाहिए।
तीन व्यावसायिक जहाजों पर हमलों का उठाया मुद्दा
भारत ने मध्य पूर्व में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। हरीश ने भारतीय ध्वज वाले जहाज एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी और पिछले सप्ताह एमटी पेट्रो डॉल्फिन तथा एमटी वाल्थेरा पर हुए हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों पर हमले किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराए जा सकते। ऐसे हमले कानूनी और नैतिक, दोनों दृष्टियों से गलत हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई जहाजों पर भारतीय नाविक तैनात रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत के लिए विशेष महत्व रखती है।
भारत के अनुसार, समुद्री मार्गों पर जहाजों को निशाना बनाए जाने से नाविकों की जान खतरे में पड़ती है। साथ ही, इससे माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की निरंतरता भी प्रभावित हो सकती है। हरीश ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय परिस्थितियों को और गंभीर बना सकती हैं। इसलिए व्यावसायिक जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही की मांग
भारतीय प्रतिनिधि ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता और व्यापार के सुरक्षित प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है और बार-बार होने वाले हमलों को रोकना जरूरी है।
भारत ने मांग की कि व्यावसायिक जहाजों, नाविकों और आम नागरिकों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले बंद किए जाएं। हरीश ने दोहराया कि तनाव को तत्काल कम करने और विवादों के समाधान के लिए बातचीत तथा कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल संबंधित देशों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं।
ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के सहयोग की सराहना
भारत ने संकट की परिस्थितियों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद के लिए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। हरीश ने कहा कि इन देशों के अधिकारियों से मिला सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच नाविकों को सुरक्षित रखने के लिए देशों के बीच समन्वय की आवश्यकता और बढ़ जाती है। भारत ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। भारत की प्राथमिकता है कि समुद्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और व्यावसायिक जहाज बिना किसी खतरे के अपने निर्धारित मार्गों पर आवाजाही कर सकें।
ब्रिक्स सम्मेलन में नाविकों के लिए सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव
समुद्री संकट के दौरान नाविकों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए संबंधित देशों के समुद्री प्राधिकरणों और दूतावासों को एक-दूसरे से जोड़ा जा सकता है।
प्रस्तावित नेटवर्क के माध्यम से संकट की स्थिति में समय पर अलर्ट जारी करने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, नाविकों के परिवारों से संपर्क स्थापित करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी में मदद करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न देशों के बीच समन्वय बेहतर बनाना और नाविकों तक सहायता तेजी से पहुंचाना है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव और समुद्री मार्गों से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत ने एक बार फिर नाविकों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही और विवादों के कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत का वक्तव्य क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर उसकी चिंताओं को सामने रखता है।



