Uttar Pradesh: पश्चिमी यूपी के 13 टोल प्लाजा होंगे हाईटेक, अब बिना रुके निकलेंगे वाहन, FASTag से कटेगा टोल
Uttar Pradesh: NHAI की नई पहल से दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान का सफर होगा सुगम; MLFF तकनीक से खत्म होंगी टोल पर लगने वाली लंबी कतारें।
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश से दिल्ली और हरियाणा की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए हाईवे का सफर जल्द पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और लंबी प्रतीक्षा से छुटकारा दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) नई तकनीक अपनाने जा रहा है। इसके तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा सीमा के आसपास के 13 टोल प्लाजा को आधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था में टोल पर बैरियर नहीं होंगे और वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे।
NHAI के पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित के अनुसार, इस परियोजना को अगले नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नई तकनीक लागू होने के बाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों की ओर जाने वाले वाहन चालकों को टोल पर लगने वाले जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
टोल प्लाजा पर नहीं करना होगा इंतजार, चलते वाहन से होगा भुगतान
अभी तक ज्यादातर टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के सामने रुकना पड़ता है। FASTag के जरिए भुगतान होने के बावजूद कई बार तकनीकी दिक्कतों और वाहनों की अधिक संख्या के कारण लंबी कतारें लग जाती हैं। MLFF सिस्टम लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में बदलाव आएगा।
नई तकनीक के तहत हाईवे पर लगे उपकरण गुजरने वाले वाहनों की पहचान करेंगे। वाहन चालकों को टोल भुगतान के लिए गाड़ी रोकने या किसी कर्मचारी से संपर्क करने की जरूरत नहीं होगी। वाहन अपनी निर्धारित गति से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे और भुगतान की प्रक्रिया अपने आप पूरी हो जाएगी।
AI कैमरे और सेंसर संभालेंगे टोल वसूली की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित हाईस्पीड कैमरों की अहम भूमिका होगी। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़कर उनकी पहचान करेंगे। इसके साथ ही रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक से वाहन में लगे FASTag को स्कैन किया जाएगा।
टोल वसूली के लिए अलग-अलग तरह के सेंसर भी लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से वाहनों की लंबाई, ऊंचाई और आकार का पता लगाया जाएगा, जिससे वाहन की श्रेणी निर्धारित की जा सकेगी। वहीं, रडार सेंसर वाहनों की रफ्तार पर नजर रखेंगे। इन सभी तकनीकों के समन्वय से टोल भुगतान की प्रक्रिया स्वचालित तरीके से संचालित होगी।
FASTag अमान्य हुआ तो वाहन मालिक को मिलेगा नोटिस
बैरियर मुक्त टोल व्यवस्था में भुगतान नहीं करने वाले वाहनों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। यदि कोई वाहन बिना टोल चुकाए निकल जाता है या उसका FASTag अमान्य पाया जाता है, तो संबंधित वाहन मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस यानी ई-नोटिस भेजा जाएगा।
नोटिस जारी होने के बाद वाहन मालिक को 72 घंटे के भीतर बकाया टोल राशि जमा करनी होगी। तय समय में भुगतान नहीं करने पर देय टोल राशि दोगुनी हो सकती है। इसके अलावा वाहन से संबंधित FASTag, एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट पर भी रोक लगाने की कार्रवाई की जा सकती है।
मेरठ से बागपत तक कई टोल प्लाजा योजना में शामिल
NHAI की इस योजना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण हाईवे और टोल प्लाजा शामिल किए गए हैं। प्रमुख मार्गों में मेरठ-नजीबाबाद, मेरठ-बुलंदशहर, पानीपत-बिजनौर, दिल्ली-सहारनपुर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे शामिल हैं।
इनके अलावा मेरठ के सिवाया और मवाना, हापुड़ के कुराना, मुजफ्फरनगर के मुजहेड़ा तथा बागपत के जीवाना टोल प्लाजा को भी नई तकनीक से जोड़ा जाएगा। हरियाणा सीमा के आसपास के टोल प्लाजा पर भी बैरियर मुक्त व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।
नौ महीने में तैयार करने की योजना
NHAI ने इन टोल प्लाजा को आधुनिक MLFF तकनीक में बदलने के लिए अगले नौ महीने का लक्ष्य रखा है। परियोजना पूरी होने के बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पहले से अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी। खासकर रोजाना दिल्ली, मेरठ, हरियाणा और आसपास के शहरों के बीच सफर करने वाले लोगों को इसका लाभ मिल सकता है।
टोल व्यवस्था बदलने से क्या होगा फायदा?
नई प्रणाली लागू होने पर हाईवे यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
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जाम से राहत: टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें कम होंगी।
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समय की बचत: भुगतान के लिए वाहन रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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ईंधन की खपत कम: बार-बार गाड़ी रोकने और स्टार्ट करने की जरूरत घटेगी।
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डिजिटल भुगतान: FASTag के माध्यम से टोल की रकम स्वतः कटेगी।
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तेज आवाजाही: दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की ओर जाने वाले यात्रियों का सफर आसान होगा।
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तकनीक से निगरानी: कैमरे और सेंसर वाहनों की पहचान और श्रेणी निर्धारित करेंगे।
इस तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 टोल प्लाजा पर MLFF तकनीक लागू होने से हाईवे यात्रा के अनुभव में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रियों को नई सुविधा का लाभ परियोजना पूरी होने और व्यवस्था शुरू होने के बाद ही मिल सकेगा।



