Ramlila Maidan Rally: प्रियंका गांधी को मंच पर बोलने का मौका नहीं मिलने पर BJP का कांग्रेस पर हमला, राहुल गांधी को लेकर किया दावा
Ramlila Maidan Rally: संबित पात्रा ने मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली का हवाला देकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा
Ramlila Maidan Rally: कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कार्यक्रमों को लेकर भाजपा ने एक बार फिर विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान प्रियंका गांधी को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। उन्होंने इस मुद्दे को कांग्रेस के भीतर कथित मतभेदों से जोड़ते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा।
संबित पात्रा ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों कार्यक्रमों में दूसरे नेताओं और वक्ताओं को बोलने का अवसर मिला, लेकिन प्रियंका गांधी संबोधित नहीं कर सकीं। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि इस वजह से वह नाखुश दिखाई दीं।
हालांकि, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बीच मतभेद होने की बात भाजपा का राजनीतिक दावा है। कार्यक्रम में किसी नेता को बोलने का मौका नहीं मिलने भर से दोनों के बीच मतभेद साबित नहीं होते।
संबित पात्रा ने दोनों कार्यक्रमों का किया जिक्र
भाजपा प्रवक्ता ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रतीकात्मक संसद का आयोजन किया था। पात्रा के मुताबिक, इस कार्यक्रम में सांसदों के साथ अन्य लोगों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, लेकिन प्रियंका गांधी को बोलने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने रामलीला मैदान की रैली का जिक्र करते हुए भी इसी तरह का आरोप लगाया। पात्रा ने कहा कि वहां विभिन्न नेताओं ने अपने विचार रखे और अपने मुद्दों पर बात की, लेकिन प्रियंका गांधी को संबोधन का अवसर नहीं दिया गया।
इसी आधार पर भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने गांधी परिवार के भीतर कथित राजनीतिक खींचतान का दावा करते हुए प्रियंका गांधी को भी ‘वोट चोरी’ का शिकार बताया। यह टिप्पणी विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थी।
रामलीला मैदान में क्यों जुटे थे विपक्षी दल?
इंडिया गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित की थी। इस प्रदर्शन का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों से था।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया।
इससे पहले 31 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन ने प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया था। विपक्ष का आरोप था कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और इससे मतदान के अधिकार से जुड़े सवाल खड़े होते हैं। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।
वोट चोरी और SIR पर सियासी टकराव जारी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा तथा विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहा है। वहीं, भाजपा नेता विपक्ष के आरोपों और उनके राजनीतिक रुख पर निशाना साध रहे हैं।
इसी बीच संबित पात्रा ने रैली में प्रियंका गांधी को बोलने का मौका नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे कांग्रेस के नेतृत्व और गांधी परिवार के बीच कथित मतभेद से जोड़ने की कोशिश की।
फिलहाल, प्रियंका गांधी को दोनों कार्यक्रमों में संबोधन का अवसर क्यों नहीं मिला, इस संबंध में उपलब्ध सामग्री में कांग्रेस का पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए इस घटनाक्रम और राहुल-प्रियंका के संबंधों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और कार्यक्रमों के पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।
भाजपा के बयान से बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
संबित पात्रा की टिप्पणी ने कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक बहस में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है। भाजपा ने जहां प्रियंका गांधी को बोलने का अवसर नहीं मिलने के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए, वहीं इंडिया गठबंधन का प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग, SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर विरोध रहा।
आगे इस मामले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, कार्यक्रमों में वक्ताओं की सूची और संबोधन के क्रम से जुड़े तथ्यों के सामने आने पर भाजपा के दावों के संदर्भ को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।



