Politics: अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज, बोले- प्रधानमंत्री बनना है तो मॉक पार्लियामेंट करते रहिए

Politics: चंडीगढ़ की रैली में गृह मंत्री ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, 1984 के सिख दंगों और महिला आरक्षण का भी उठाया मुद्दा।

Politics:  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो मॉक पार्लियामेंट करते रहना चाहिए, लेकिन उनका नंबर आने वाला नहीं है। चंडीगढ़ में आयोजित एक रैली के दौरान शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की।

शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर कई मुद्दों को लेकर हमला बोला। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों, महिला आरक्षण, संसद की कार्यवाही और नशामुक्त भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि कांग्रेस को पहले अपने पुराने कार्यकाल और फैसलों पर जवाब देना चाहिए।

मॉक पार्लियामेंट को लेकर राहुल गांधी पर कसा तंज

अमित शाह ने रामलीला मैदान में आयोजित मॉक पार्लियामेंट का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री बनना है तो ऐसे ही मॉक पार्लियामेंट करते रहिए। आपका नंबर नहीं लगने वाला है।”

शाह की यह टिप्पणी INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित कार्यक्रम को लेकर थी। उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप भी लगाया। शाह के मुताबिक, राहुल गांधी और कांग्रेस को संसदीय व्यवस्था के भीतर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

1984 के सिख दंगों का मुद्दा उठाकर कांग्रेस को घेरा

अपने भाषण में गृह मंत्री ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हजारों सिखों की हत्या हुई थी और कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने दोषियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

शाह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बयान “जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बाद में मामलों को दोबारा खोला गया और कुछ कांग्रेस नेताओं को जेल भी जाना पड़ा।

गृह मंत्री ने रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी कार्यक्रम को 1984 के पीड़ितों के जख्मों से जोड़ते हुए आलोचना की। हालांकि, दंगों से जुड़े मामलों, जांच और दोषसिद्धि की स्थिति को न्यायालय के रिकॉर्ड के आधार पर ही समझा जाना चाहिए। शाह के भाषण में लगाए गए आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया

अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब सहित पूरे देश को नशामुक्त बनाना है। उन्होंने इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान में केंद्र और राज्य स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत है। पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी और युवाओं में नशे की लत को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। इस मुद्दे पर सरकार की कार्रवाई और नतीजों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

महिला आरक्षण को लेकर भी कांग्रेस पर आरोप

गृह मंत्री ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े प्रयासों का विरोध किया। शाह ने कहा कि सरकार महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और महिला आरक्षण को लागू कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

उन्होंने विपक्ष पर इस विषय को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। शाह के अनुसार, महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है। वहीं, इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के रुख और लागू होने वाली संवैधानिक तथा कानूनी व्यवस्थाओं को आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर समझना जरूरी है।

2029 के चुनाव को लेकर विपक्ष पर निशाना

अमित शाह ने अपने संबोधन में 2029 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनता चुनाव में राजनीतिक दलों के कामकाज और उनके रुख का हिसाब करेगी। शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को केवल विरोध करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए और दावा किया कि जनता आने वाले चुनावों में विपक्ष के रवैये का जवाब देगी। ये टिप्पणियां शाह के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा हैं।

पंजाब की राजनीति के बीच शाह का संदेश

चंडीगढ़ की रैली में अमित शाह ने पंजाब की राजनीति, राष्ट्रीय मुद्दों और कांग्रेस की भूमिका को एक साथ उठाया। उनके भाषण में नशामुक्त भारत का लक्ष्य, 1984 के दंगे, महिला आरक्षण और राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियां प्रमुख रहीं।

शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और भविष्य के लक्ष्यों को सामने रखा। वहीं, उनके बयानों पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है। फिलहाल, रैली में दिए गए इस संबोधन ने पंजाब की राजनीति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी बयानबाजी को चर्चा में ला दिया है।

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