Uttar Pradesh Politics: मुलायम सिंह यादव का नाम लेकर अखिलेश पर बरसे अमित शाह, बोले- जनता तीसरी पीढ़ी को भी माफ नहीं करेगी
Uttar Pradesh Politics: लखनऊ में भाजपा कार्यसमिति की बैठक में सपा पर निशाना, 2027 चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को जुटने का दिया संदेश
Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच लखनऊ में आयोजित भाजपा कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए सपा की राजनीति पर सवाल उठाए।
अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता किसी राजनीतिक परिवार की तीसरी पीढ़ी को भी उसके कामकाज के आधार पर ही परखेगी। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
मुलायम सिंह यादव और कारसेवकों पर गोलीबारी का मुद्दा उठाया
अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस घटना का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
शाह ने कहा कि भाजपा राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख लगातार स्पष्ट करती रही है। उन्होंने इस प्रसंग के जरिए अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की और कहा कि सपा को अपने पुराने राजनीतिक फैसलों का जवाब देना चाहिए।
अमित शाह ने अपने संबोधन में मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक दौर और वर्तमान सपा नेतृत्व के बीच तुलना करते हुए पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास और सुशासन के आधार पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन करती है।
परिवारवाद और जातिवाद को लेकर सपा पर हमला
गृह मंत्री ने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति का आधार विकास, संगठन और जनकल्याण है, जबकि विपक्षी दलों पर परिवार और सीमित राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
शाह ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के सामने अपने कामकाज का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाएं तथा विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब दें।
2014 से लेकर 2022 तक के चुनावी नतीजों का किया उल्लेख
अमित शाह ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए भाजपा की राजनीतिक यात्रा को सामने रखा। उन्होंने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव, 2017 के विधानसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव के परिणामों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने संगठन की ताकत और कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की है। शाह ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि चुनावी सफलता के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना और जनता के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी है।
विकास और रोजगार के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा
अपने भाषण में गृह मंत्री ने प्रदेश में हुए विकास कार्यों और रोजगार से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सरकार की उपलब्धियों को केवल बैठकों तक सीमित न रखें, बल्कि गांवों, कस्बों और शहरों में जाकर लोगों को इसकी जानकारी दें। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने और जनता के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान लगाने का आह्वान
भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों के लिए प्रेरित करते हुए अमित शाह ने अर्जुन के लक्ष्य पर केंद्रित रहने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को भी अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए और संगठन के लिए लगातार काम करना चाहिए।
उनके संबोधन का मुख्य संदेश आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन में सक्रियता बढ़ाना रहा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर मेहनत करने, सरकार की योजनाओं का प्रचार करने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने का आह्वान किया।
2027 के चुनाव को लेकर भाजपा ने तेज की तैयारी
लखनऊ में हुई भाजपा कार्यसमिति की बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में संगठन की मजबूती, सरकार के कामकाज और विपक्ष की राजनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने अपने संबोधन के जरिए कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य की याद दिलाई और सपा सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधा। दूसरी ओर, उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों और नेताओं के बयानों पर सबकी नजर है।



