Ashtami 2026: अष्टमी पर भद्रा का संयोग, दोपहर में बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग; जानें पूजा-पाठ पर क्या होगा असर
Ashtami 2026: 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे से अष्टमी तिथि के साथ भद्रा का आरंभ, जबकि दोपहर 12:49 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की जानकारी।
Ashtami 2026: शारदीय नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर 2026 को अष्टमी तिथि के साथ भद्रा का संयोग बन रहा है। इसी दिन दोपहर से सर्वार्थ सिद्धि योग भी शुरू होने की जानकारी पंचांग में दी गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि भद्रा के दौरान मां दुर्गा की पूजा करना उचित होगा या नहीं और क्या सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से भद्रा का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा के समय कुछ मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, इन दोनों के एक साथ होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी कार्यों के नियम बदल जाते हैं। नियमित देवी आराधना और विशेष मांगलिक अनुष्ठानों के लिए अलग-अलग नियम माने जाते हैं।
सुबह 8:27 बजे शुरू होगी अष्टमी और भद्रा
दिल्ली के पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसी समय विष्टि करण के कारण भद्रा भी शुरू होने की जानकारी दी गई है। भद्रा रात 9 बजकर 42 मिनट तक रहने का उल्लेख है।
दिन के प्रमुख पंचांग समय इस प्रकार हैं:
| विवरण | समय |
|---|---|
| अष्टमी तिथि का आरंभ | सुबह 8:27 बजे |
| भद्रा का आरंभ | सुबह 8:27 बजे |
| भद्रा की समाप्ति | रात 9:42 बजे |
| सर्वार्थ सिद्धि योग का आरंभ | दोपहर 12:49 बजे |
| सर्वार्थ सिद्धि योग की समाप्ति | 19 अक्टूबर, सुबह 6:24 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे |
| राहुकाल | शाम 4:23 से 5:49 बजे |
ध्यान दें कि ये समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। दूसरे शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण इनमें अंतर हो सकता है।
भद्रा के दौरान भी कर सकते हैं देवी की आराधना
भद्रा को ज्योतिष में विष्टि करण कहा जाता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और कुछ अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भद्रा लगने पर पूजा-पाठ भी रोक देना चाहिए।
श्रद्धालु इस दौरान मां दुर्गा की नियमित पूजा कर सकते हैं। दीपक जलाना, पुष्प अर्पित करना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप और आरती जैसी धार्मिक गतिविधियां अपनी परंपरा के अनुसार की जा सकती हैं।
हालांकि, विशेष हवन, अनुष्ठान या संस्कार के लिए केवल भद्रा का समय देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। ऐसे कार्यों के लिए तिथि, नक्षत्र, करण और संबंधित धार्मिक परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से खत्म नहीं होगी भद्रा
पंचांग के अनुसार, दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की जानकारी दी गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
लेकिन सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से भद्रा अपने आप समाप्त नहीं होती। दिए गए समय के अनुसार, दोनों का संयोग रात 9 बजकर 42 मिनट तक बना रह सकता है। इसलिए इस अवधि को हर तरह के मांगलिक कार्य के लिए स्वतः दोषमुक्त मानना सही नहीं होगा।
देवी की नियमित उपासना और मंत्र जाप के लिए श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार समय चुन सकते हैं। वहीं, किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या जानकार पंडित से सलाह लेना उचित रहेगा।
महागौरी की पूजा और महाष्टमी व्रत कब रखा जाएगा?
अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 51 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। उदया तिथि के आधार पर इस बार महाष्टमी व्रत और मां महागौरी की विशेष पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को किए जाने का उल्लेख है।
यहां तिथि शुरू होने और व्रत मनाए जाने के दिन के बीच अंतर समझना जरूरी है। तिथि एक दिन शुरू होकर अगले दिन तक रह सकती है। ऐसे में व्रत और विशेष पूजा का दिन तय करते समय उदया तिथि तथा स्थानीय परंपरा को ध्यान में रखा जाता है।
कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को भी अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करना चाहिए। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त अलग हो सकते हैं।
अष्टमी पर पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अष्टमी के दिन देवी आराधना करने वाले श्रद्धालुओं को भद्रा और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग को लेकर अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है। नियमित पूजा-पाठ और विशेष मांगलिक कार्यों के नियम अलग-अलग माने जाते हैं।
- मां दुर्गा की नियमित पूजा, आरती और मंत्र जाप कर सकते हैं।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ अपनी परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
- विशेष हवन और अनुष्ठान के लिए अलग से मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
- महाष्टमी व्रत और कन्या पूजन की तारीख तय करते समय स्थानीय पंचांग पर ध्यान दें।
- दिल्ली के पंचांग में दिए गए समय को दूसरे शहरों में बिना पुष्टि के लागू न मानें।
इस तरह अष्टमी पर भद्रा और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पंचांग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भद्रा में मां दुर्गा की नियमित पूजा नहीं की जा सकती। विशेष अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्णय लेना बेहतर रहेगा।



