France Protests: फ्रांस में प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप, आग की भेंट चढ़ा लिमोज का ऐतिहासिक टाउन हॉल

France Protests: महंगाई और जीवनयापन के खर्च के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, सरकार ने 5.5 लाख तो यूनियन ने 8 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया।

France Protests

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कई शहरों में हिंसक हो गया। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। इसी दौरान लिमोज शहर में एक ऐतिहासिक टाउन हॉल आग की चपेट में आ गया और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। इसके अलावा राजधानी पेरिस सहित कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।

फ्रांस के गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन में करीब 5.5 लाख लोगों के शामिल होने की जानकारी दी, जबकि सीजीटी यूनियन ने यह संख्या लगभग आठ लाख बताई। अलग-अलग शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

140 साल से ज्यादा पुरानी इमारत को भारी नुकसान

लिमोज स्थित टाउन हॉल में लगी आग ने शहर की ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचाया है। इस इमारत का निर्माण 19वीं सदी में हुआ था और इसका उद्घाटन वर्ष 1883 में किया गया था। लंबे समय से यह भवन शहर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, उपद्रव के दौरान कुछ लोगों ने टाउन हॉल के बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी को आग लगा दी। इसके बाद खिड़कियां तोड़ी गईं और इमारत के भीतर आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई। आग की गंभीरता को देखते हुए दमकलकर्मियों को मौके पर बुलाया गया।

ऐतिहासिक भवन को हुए नुकसान के बाद इसकी सुरक्षा और संरक्षण को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, इमारत को हुए कुल नुकसान और उसकी मरम्मत में लगने वाले समय का आकलन संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पेरिस और दूसरे शहरों में भी उपद्रव

प्रदर्शन के दौरान हिंसा का असर फ्रांस के कई हिस्सों में दिखाई दिया। पेरिस में वाहनों को आग लगाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। ल्योन में एक पर्यटन कार्यालय को आग के हवाले किए जाने की खबर मिली। मार्सिले और लिली समेत अन्य शहरों में भी सार्वजनिक परिसरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई।

कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की और सामान लूटने की घटनाएं हुईं। कई इलाकों में पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। राजधानी के कुछ हिस्सों में सड़कें बाधित हुईं और स्थानीय प्रशासन को स्थिति सामान्य करने के लिए प्रयास करने पड़े।

गृह मंत्रालय ने बताई प्रदर्शनकारियों की संख्या

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार के प्रदर्शनों में लगभग 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। दूसरी ओर, सीजीटी यूनियन ने दावा किया कि देशभर में करीब आठ लाख लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इन आंकड़ों में अंतर के बावजूद दोनों पक्षों के विवरण से यह स्पष्ट है कि प्रदर्शनों का दायरा कई शहरों तक फैला था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में करीब 1,200 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के दौरान सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबरें भी आईं।

प्रशासन ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। अधिकारियों की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

नकाबपोश समूहों पर हिंसा फैलाने के आरोप

फ्रांस के गृह मंत्रालय ने पेरिस, रेनेस, टूलूज और एंगर्स समेत कई शहरों में नकाबपोश समूहों की गतिविधियों का उल्लेख किया। अधिकारियों ने कुछ हिंसक घटनाओं के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और उपद्रवी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया।

रिपोर्टों के अनुसार, ल्योन, मोंटपेलियर और वैलेंस जैसे शहरों में भी सड़क किनारे रखे सामान में आग लगाने, दुकानों को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक इमारतों में तोड़फोड़ करने की घटनाएं हुईं। हालांकि, हिंसा में शामिल प्रत्येक समूह की भूमिका और घटनाओं के कारणों की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

राष्ट्रपति ने दोषियों पर कार्रवाई का दिया संकेत

फ्रांस में हुई आगजनी और तोड़फोड़ के बाद सरकार की ओर से सख्त रुख अपनाने की बात कही गई। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने और कानून के मुताबिक सजा दिलाने की बात कही।

प्रशासन के सामने एक ओर सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रदर्शन के पीछे मौजूद आर्थिक और सामाजिक असंतोष से जुड़े सवाल भी हैं। प्रदर्शन में शामिल अलग-अलग समूहों की मांगों में जीवनयापन का खर्च, सार्वजनिक सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल रहे।

जेडी वेंस ने पश्चिमी देशों की नीतियों पर उठाए सवाल

फ्रांस की घटनाओं पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने पश्चिमी देशों की इमिग्रेशन नीतियों और उदारवादी राजनीतिक दृष्टिकोण की आलोचना की।

वेंस ने आरोप लगाया कि विविधता और करुणा के नाम पर आप्रवासन को बढ़ावा देने वाले नेताओं ने सामाजिक एकीकरण से जुड़े सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने फ्रांस की ऐतिहासिक धरोहर को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए वहां के लोगों से हिंसा रोकने की अपील भी की।

अपने बयान में वेंस ने अमेरिकी राजनीति का उल्लेख करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को फ्रांस की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

वेंस की टिप्पणी इमिग्रेशन और पश्चिमी देशों की नीतियों को लेकर उनका राजनीतिक नजरिया है। वहीं, फ्रांस में प्रदर्शन के तात्कालिक कारणों में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ा असंतोष भी शामिल रहा।

ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

फ्रांस में हुए प्रदर्शनों के दौरान लिमोज के टाउन हॉल को नुकसान पहुंचने की घटना ने ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आगजनी और तोड़फोड़ से न केवल सार्वजनिक संपत्ति प्रभावित हुई, बल्कि स्थानीय विरासत को भी नुकसान पहुंचा।

फिलहाल प्रशासन हिंसा से प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य करने और घटनाओं की जांच में जुटा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि ऐतिहासिक भवन को कितना नुकसान हुआ और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।


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