FSDA: हेल्थ सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता पर यूपी में सख्ती, दो कंपनियों के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति
FSDA: कानपुर और ग्रेटर नोएडा की निर्माण इकाइयों में जांच के दौरान मिलीं गंभीर खामियां, एफएसडीए ने नमूने लेकर सीजर की कार्रवाई की
FSDA: प्रदेश में खाद्य पदार्थों और हेल्थ सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में कानपुर नगर और गौतमबुद्ध नगर में न्यूट्रास्यूटिकल्स तथा हेल्थ सप्लीमेंट्स बनाने वाली दो कंपनियों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर विभाग ने दोनों फर्मों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की है।
विभागीय टीमों ने निर्माण इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और जरूरी अभिलेखों की उपलब्धता की पड़ताल की। कार्रवाई के दौरान प्रयोगशाला में जांच के लिए नमूने लिए गए और सीजर की कार्रवाई भी की गई। एफएसडीए का उद्देश्य खाद्य कारोबार में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।
कानपुर की केएसबी लाइफ केयर्स में जांच
कानपुर नगर के श्रीनगर, पहाड़पुर बिंगनवा स्थित मेसर्स केएसबी लाइफ केयर्स का निरीक्षण मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय पाण्डेय के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सचल दल ने किया।
जांच के दौरान टीम को गंभीर गैर-अनुपालन मिला। इसके बाद जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए नमूने एकत्र किए गए और सीजर की कार्रवाई की गई। निरीक्षण दल ने अपनी रिपोर्ट में फर्म का लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की है।
ग्रेटर नोएडा की उर्मीलाइफ साइंस में भी मिलीं खामियां
गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा स्थित साइट-V, कासना औद्योगिक क्षेत्र में मेसर्स उर्मीलाइफ साइंस की निर्माण इकाई की जांच की गई। यहां भी न्यूट्रास्यूटिकल्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स के उत्पादन से जुड़े दस्तावेजों तथा प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां सामने आईं।
विभागीय टीम ने उत्पादों के नमूने प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए लिए। साथ ही सीजर की कार्रवाई करते हुए फर्म का लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई।
उत्पादन के जरूरी रिकॉर्ड नहीं मिले
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि उर्मीलाइफ साइंस में न्यूट्रास्यूटिकल्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स का निर्माण बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड के बिना किया जा रहा था। इसके अलावा, उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के विश्लेषण प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे।
विभाग के अनुसार, फर्म तैयार उत्पादों की जांच रिपोर्ट और बैच रिलीज से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सकी। ये अभिलेख उत्पादन प्रक्रिया और उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होते हैं। इनके अभाव को विभाग ने गंभीर गैर-अनुपालन माना।
लैब रिपोर्ट मिलने से पहले री-लेबलर को दिए उत्पाद
जांच में यह भी पाया गया कि फर्म ने NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही तैयार उत्पाद संबंधित री-लेबलर को सौंप दिए थे। विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपनी रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया।
खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण और संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है। निरीक्षण के दौरान इन प्रक्रियाओं से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की।
पैकेजिंग और लेबलिंग से जुड़ी विसंगतियां भी उजागर
उर्मीलाइफ साइंस की निर्माण इकाई में खाद्य पदार्थों के निर्माण के अलावा पैकेजिंग और लेबलिंग से संबंधित अन्य विसंगतियां भी पाई गईं। निरीक्षण दल ने इन कमियों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
एफएसडीए की कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियां उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और लेबलिंग तक निर्धारित नियमों का पालन करें। विभागीय जांच और प्रयोगशाला विश्लेषण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए निगरानी अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जांच की जा रही है। कानपुर और ग्रेटर नोएडा की दोनों इकाइयों में मिली कमियों के बाद लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन की सिफारिश की गई है। इसे अंतिम निलंबन आदेश नहीं माना जाना चाहिए। नमूनों की जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।



