Stock Market: अमेरिकी कार्रवाई के बीच TCS के शेयरों में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा चढ़ा

Stock Market: आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा, TCS के तिमाही नतीजों और डिविडेंड की घोषणा से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के दौर के बाद जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी में आईटी कंपनियों के शेयरों का अहम योगदान रहा। खास तौर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका की ओर से बड़ी टेक कंपनियों के लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रमों पर कार्रवाई की खबरों के बीच TCS के शेयरों में तेजी आई। कंपनी के तिमाही वित्तीय नतीजों और लाभांश की घोषणा ने भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।

TCS के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी

कारोबार के दौरान TCS के शेयरों में 5 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। शेयर की कीमत करीब 2,193 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। कंपनी के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन की खबर से निवेशकों ने आईटी शेयरों में खरीदारी की।

TCS ने तिमाही के दौरान 13,884 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15 फीसदी अधिक रहा। कंपनी के परिचालन राजस्व में भी लगभग 11.2 फीसदी की वृद्धि हुई। इसके साथ ही कंपनी ने 12 रुपये प्रति शेयर के लाभांश की घोषणा की।

इन नतीजों ने बाजार में कंपनी के शेयरों को समर्थन दिया और आईटी क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाई।

सेंसेक्स और निफ्टी में दिखी मजबूत रिकवरी

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 292 अंकों की बढ़त के साथ 71,876.10 के स्तर पर पहुंचा था। वहीं निफ्टी 84.60 अंक चढ़कर 22,310.40 के आसपास कारोबार कर रहा था। बाद में बाजार में तेजी बढ़ी और सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक उछलकर 72,400 के पार पहुंच गया। निफ्टी में भी करीब 284 अंकों की बढ़त के साथ 22,515 के स्तर के आसपास कारोबार देखने को मिला।

बाजार में आई इस तेजी से पिछले सत्र की गिरावट के बाद निवेशकों को कुछ राहत मिली। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

अमेरिकी फैसले से आईटी कंपनियों पर दबाव की आशंका

भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन की ओर से आठ बड़ी टेक कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रमों को निलंबित करने की खबर चर्चा में रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई के दायरे में TCS, Infosys और Wipro जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन देने से अमेरिकी कामगारों को नुकसान पहुंचने संबंधी चिंताएं जताई हैं। मामले की जांच जारी रहने तक ग्रीन कार्ड से जुड़ी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने की बात भी सामने आई है।

इस घटनाक्रम से संबंधित कंपनियों की नियुक्ति प्रक्रिया और अमेरिकी कारोबार पर संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव जांच के नतीजों और आगे होने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।

दूसरी आईटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी

TCS के साथ अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। Infosys, HCL Technologies और Tech Mahindra के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा ITC, Adani Ports और HDFC Bank जैसे शेयर भी तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए।

दूसरी ओर Eternal, BEL, Reliance Industries और ICICI Bank के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे साफ रहा कि बाजार में तेजी के बावजूद सभी शेयरों में एक जैसा रुझान नहीं था।

पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद लौटी खरीदारी

इससे पहले कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार पर भारी दबाव देखने को मिला था। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 फीसदी गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 371.25 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 22,231.80 के स्तर पर आ गया था।

उस सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 12,943.58 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ाई थी।

इसके बाद आई तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। निवेशकों की नजर अब कंपनियों के नतीजों, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।

आगे बाजार की चाल पर रहेगी निवेशकों की नजर

TCS के मजबूत नतीजों और आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, अमेरिकी नीतिगत फैसलों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारक बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम और अपनी निवेश अवधि को ध्यान में रखें।

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