Stock Market Crash: दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का तूफान, सेंसेक्स 1200 अंक लुढ़का; निवेशकों की संपत्ति में 10.5 लाख करोड़ की कमी

Stock Market Crash: RBI की सख्त मौद्रिक नीति, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार पर बढ़ा दबाव; निफ्टी भी 22,200 के आसपास फिसला

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार में लगातार दूसरे सत्र से कमजोरी के बीच निवेशकों की चिंता कई मोर्चों पर बढ़ी हुई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी, महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने बाजार का सेंटीमेंट प्रभावित किया।

इस गिरावट का असर कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर भी पड़ा। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैप में एक ही कारोबारी सत्र में करीब 10.5 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

सेंसेक्स में 1200 अंक से ज्यादा की गिरावट

गुरुवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,231 अंक टूटकर 71,406 के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 1.6-1.8 फीसदी नीचे आया और 22,200 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। रॉयटर्स के अनुसार सेंसेक्स 32 महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 1.64 फीसदी नीचे रहा।

बाजार में गिरावट व्यापक रही। प्रमुख सेक्टरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

एक दिन में 10.5 लाख करोड़ घटा मार्केट कैप

शेयरों में गिरावट का सीधा असर बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को बाजार बंद होने पर कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप करीब 4,72,35,273 करोड़ रुपये था।

गुरुवार को भारी बिकवाली के बाद यह घटकर करीब 4,61,83,659 करोड़ रुपये रह गया। यानी कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 10,51,614 करोड़ रुपये की कमी आई।

यह रकम किसी एक निवेशक के खाते से निकली राशि नहीं है, बल्कि शेयरों के बाजार मूल्य में गिरावट के कारण कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में आई कमी है।

RBI की दर बढ़ोतरी से बाजार पर दबाव

शेयर बाजार की कमजोरी के पीछे RBI का ताजा फैसला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी है।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। RBI ने संकेत दिया है कि निकट अवधि में दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है और आगे का कदम परिस्थितियों के आधार पर बढ़ोतरी या विराम हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है।

भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। बाजार में इस वजह से कंपनियों की लागत और भविष्य की कमाई को लेकर भी चिंता बढ़ती है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी ने भी हालात मुश्किल किए हैं। रॉयटर्स के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने लगातार नौ कारोबारी सत्रों में करीब 4.86 अरब डॉलर की बिकवाली की है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की निकासी लगभग 30.4 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

विदेशी पूंजी की निकासी से शेयरों पर दबाव बढ़ने के साथ रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है।

कमजोर रुपया भी बना चिंता की वजह

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी भारतीय बाजार के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बनाया है। खासकर ऐसे समय में जब महंगे तेल से आयात बिल बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

निवेशक अब अमेरिकी ब्याज दरों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, रुपये और कच्चे तेल की कीमतों को भी बाजार की अगली दिशा के लिए अहम संकेतक मान रहे हैं।

क्या आगे भी जारी रह सकती है उठापटक?

बाजार की अगली दिशा कई घरेलू और वैश्विक संकेतकों पर निर्भर करेगी। RBI की नई नीति, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

हालांकि RBI ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है, लेकिन महंगाई और ऊर्जा कीमतों को लेकर जोखिम भी बढ़े हैं। ऐसे में मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद शेयर बाजार में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

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