International Politics: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ईरान ने कतर की मध्यस्थता के जरिए वाशिंगटन तक सात प्रमुख शर्तें पहुंचाई हैं और कहा है कि आगे की बातचीत इन्हीं मांगों पर निर्भर करेगी।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता और तनाव कम करने के लिए अमेरिका को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे।
ईरानी पक्ष का कहना है कि बातचीत शुरू करने से पहले क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों को रोकना आवश्यक है। इसके अलावा विदेशों में रोकी गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने और आर्थिक व समुद्री प्रतिबंधों में राहत देने जैसी मांगें भी प्रस्ताव का हिस्सा हैं।
रेजाई ने कहा कि यदि इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति होती है तो दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खुल सकता है।
कतर सहित कई क्षेत्रीय देश अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल के हफ्तों में कई कूटनीतिक संपर्क हुए हैं ताकि तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में मध्यस्थ देशों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपनी सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। वहीं क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
हालांकि दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक स्तर पर संवाद की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
तेहरान का कहना है कि अब अगला कदम वाशिंगटन को उठाना है। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, यदि प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो कूटनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।
ईरान ने एक बार फिर कहा है कि उसकी परमाणु नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
फिलहाल सबकी नजर अमेरिका के जवाब पर टिकी है। यदि दोनों पक्ष कूटनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बन सकती है। वहीं किसी भी नकारात्मक प्रतिक्रिया से हालात और जटिल होने की आशंका भी बनी हुई है।