Uttar Pradesh Politics: ‘फूलन देवी की राजनीतिक विरासत छीनी’, संजय निषाद का सपा पर हमला; मछुआरा समाज को दी ये चेतावनी
यूपी में चुनावी सरगर्मी के बीच निषाद पार्टी प्रमुख का तीखा बयान, बोले- साढ़े चार साल गायब रहने वाले अब पंचायत के बहाने सक्रिय हो रहे हैं
Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मछुआरा समाज को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। निषाद पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने फूलन देवी का जिक्र करते हुए सपा पर कई गंभीर आरोप लगाए और मछुआरा समाज से चुनावी मौसम में अचानक सक्रिय होने वाले नेताओं से सावधान रहने की अपील की।
‘साढ़े चार साल बाद अब क्यों याद आया समाज?’
संजय निषाद ने अपने पोस्ट में मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत मछुआरा समुदाय का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जो लोग लंबे समय तक समाज के सुख-दुख में दिखाई नहीं दिए, वे अब चुनावी गतिविधियां बढ़ने के साथ पंचायत और दूसरे कार्यक्रमों के बहाने समुदाय के बीच पहुंचने लगे हैं।
उन्होंने ऐसे राजनीतिक चेहरों को ‘बरसाती मेंढक’ बताते हुए समाज को उनसे सतर्क रहने की सलाह दी। निषाद ने यह भी कहा कि मछुआरा समाज को अपने राजनीतिक हितों और अधिकारों को लेकर सजग रहना चाहिए।
फूलन देवी को लेकर लगाए गंभीर आरोप
अपने दूसरे सोशल मीडिया पोस्ट में संजय निषाद ने पूर्व सांसद फूलन देवी का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फूलन देवी की राजनीतिक लोकप्रियता बढ़ने और अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश के दौरान उनके खिलाफ साजिश की गई।
निषाद ने यह दावा भी किया कि उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश थी और उनकी संपत्ति तथा राजनीतिक विरासत को लेकर भी गलत तरीके से कब्जे की कोशिश हुई। ये संजय निषाद द्वारा लगाए गए आरोप हैं; उन्होंने इन मामलों की जांच को लेकर पहले भी सवाल उठाए हैं।
फूलन देवी की हत्या 2001 में दिल्ली में हुई थी। उनके मामले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से समय-समय पर अलग-अलग दावे और जांच की मांग सामने आती रही है। ऐसे में संजय निषाद के ताजा बयान को उनके लंबे समय से उठाए जा रहे इस राजनीतिक मुद्दे के संदर्भ में देखा जा रहा है।
मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान पर जोर
संजय निषाद ने अपने संदेश में समुदाय की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज को केवल चुनाव के समय याद करने वाली राजनीति से सावधान रहने की जरूरत है।
उनका कहना है कि निषाद, मल्लाह और दूसरे मछुआरा समुदायों के लोगों को अपने अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के सवाल पर संगठित रहना चाहिए। उन्होंने निषाद पार्टी को इसी राजनीतिक पहचान का माध्यम बताया।
2027 से पहले बढ़ रही सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच निषाद समाज को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
संजय निषाद हाल के दिनों में अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। सितंबर में गोंडा के एक व्यापारी की हत्या के बाद उन्होंने प्रदर्शन भी किया था। इस मामले में उनका कहना था कि उनका विरोध निषाद समुदाय के न्याय के लिए था।
इससे पहले संजय निषाद ने 2027 चुनाव को लेकर सीट बंटवारे और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि अगर समुदाय की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो उनकी पार्टी आगे के राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकती है।
ऐसे में फूलन देवी और मछुआरा समाज को लेकर उनका ताजा बयान उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक पहचान के मुद्दे को फिर से चर्चा में ले आया है।



